वर्धा के हिंदी विश्वविद्यालय में छात्रों का अनिश्चितकालीन सत्याग्रह जारी, मिल रहा राजनीतिक संगठनों का समर्थन

Wardha Hindi University: वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के आंदोलनकारी छात्रों के सत्याग्रह को समर्थन मिला। छात्रों ने शैक्षणिक सुधार की मांग की।
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वर्धा हिंदी विश्वविद्यालय आंदोलन(सोर्सः सोशल मीडिया)
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Mahatma Gandhi International Hindi University Wardha: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के आंदोलनकारी छात्रों द्वारा विभिन्न मांगों को लेकर गांधी पुतला स्थल के सामने शुरू किए गए अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आंदोलन को समर्थन देने के लिए रविवार को सभा का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी कार्यालय के समीप गांधी प्रतिमा के पास आयोजित सभा में सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र के साथियों ने उपस्थित होकर छात्रों के आंदोलन को समर्थन दिया।

आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों में विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सुधार, छात्रों की बुनियादी समस्याओं का समाधान तथा स्त्री अध्ययन और फिल्म अध्ययन विभाग को वर्धा में पुनः शुरू करना शामिल है। छात्रों का आरोप है कि इन मांगों को लेकर आवाज उठाने वाले विश्वविद्यालय के छह दलित-ओबीसी छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई तथा उन्हें विश्वविद्यालय में प्रवेश से प्रतिबंधित किया गया। इसके विरोध में छात्र अनिश्चितकालीन सत्याग्रह कर रहे हैं।

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जारी रहेगा सत्याग्रह आंदोलन

सभा में छात्रों के आंदोलन को व्यापक समर्थन देने, उनकी मांगों को प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रबंधन तक पहुंचाने तथा आंदोलन में सहयोग करने का आह्वान किया गया। उपस्थित सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने छात्रों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए उनकी मांगों के समाधान की दिशा में पहल करने की बात कही। इस अवसर पर आंदोलनकारी छात्रों सहित सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े नागरिकों की उपस्थिति रही। छात्रों ने कहा कि उनकी मांगों का समाधान होने तक सत्याग्रह आंदोलन जारी रहेगा।

छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करना उचित नहीं

सभा में वक्ताओं ने कहा कि विद्यार्थियों की शैक्षणिक एवं बुनियादी समस्याओं का समाधान करने के बजाय आंदोलन करने वाले छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करना उचित नहीं है। विश्वविद्यालय में लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वाले छात्रों की आवाज सुनी जानी चाहिए। स्त्री अध्ययन और फिल्म अध्ययन विभाग जैसे शैक्षणिक विभागों की वर्धा में पुनः वापसी की मांग पर भी सकारात्मक निर्णय लेने की आवश्यकता व्यक्त की गई।

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