Wardha News: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में दो पीएचडी शोधार्थियों की फेलोशिप के भुगतान को लेकर विवाद बढ़ गया है. नागपुर उच्च न्यायालय ने जनवरी 2024 में उनके निष्कासन और निलंबन को अवैध ठहराया था, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब तक उनकी शोधवृत्ति फेलोशिप जारी नहीं की है.
दोनों शोधार्थी स्त्री अध्ययन विभाग सत्र 2021 से जुड़े हैं. उनका आरोप है कि पिछले चार वर्षों से विश्वविद्यालय में हो रही अवैध शिक्षक नियुक्तियों, वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने की वजह से उन्हें प्रतिशोध का सामना करना पड़ रहा है. निवेदन में कहा है कि, उच्च न्यायालय ने जनवरी 2024 में कहा था कि, राजेश कुमार यादव और रामचंद्र दोनों शोधार्थियों के निष्कासन/निलंबन में प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन हुआ है.
इसके बाद दोनों को बहाल किया गया, लेकिन उनके जनवरी 20232025 और जनवरी 20242025 की फेलोशिप का भुगतान अब तक लंबित है. शोधार्थियों ने बताया कि उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षा मंत्रालय, यूजीसी, राष्ट्रपति सचिवालय और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से कई बार शिकायतें कीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. इसके बाद उन्होंने पुनः उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया.
शोधार्थियों का आरोप है कि वर्तमान कार्यवाहक कुलसचिव कादर नवाजखान पर 20192023 के दौरान 18 अवैध शिक्षक नियुक्तियों, फर्जी प्रमाणपत्र और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप हैं. इसके बावजूद न तो उनके खिलाफ कोई कार्रवाई हुई और न ही उन्हें जांच के लिए हटाया गया. इसके अलावा, विश्वविद्यालय ने प्रो. अवधेश कुमार की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति गठित की है, जिसने जनवरी 2024 में अवैध निष्कासन/निलंबन के आदेश दिए थे.
यह विवाद विश्वविद्यालय की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है, खासकर तब जब 16 अप्रैल को दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने वाली हैं.
शोधार्थियों की प्रमुख मांगें शोधार्थियों का कहना है कि इसमें पूर्वाग्रह का आरोप है और समिति में एससी/एसटी/ओबीसी प्रतिनिधि नहीं हैं. शोधार्थियों की मांगें बकाया फेलोशिप तत्काल जारी की जाए, 27 जनवरी 2024 की कार्रवाई में शामिल अधिकारियों और शिक्षकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हो, 20192023 की शिक्षक नियुक्तियों की स्वतंत्र जांच कराई जाए, कादर नवाज खान को पद से हटाकर उनकी भूमिका की जांच हो, प्रो. अवधेश कुमार की अध्यक्षता वाली जांच समिति रद्द की जाए, राजेश कुमार यादव के खिलाफ दर्ज तीन एफआईआर रद्द की जाने की मांगें शामिल है.