

Wardha District Hospital: अमरावती जिला महिला अस्पताल में गत मध्यरात्रि भीषण आगजनी की घटना सामने आई। इसके साथ ही वर्धा जिला अस्पताल भी एक बार फिर चर्चा में आ गया है। पिछले छह महीनों में वर्धा के सिविल अस्पताल में भी दो बार आग लग चुकी है। इसमें भारी नुकसान हुआ था। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन ने उपाय योजना को लेकर किसी प्रकार की सुध नहीं ली है।
सूत्रों के अनुसार, जिला अस्पताल में लगाई गई फायर यंत्रणा आज भी निष्क्रिय होने की गंभीर बात सामने आई है। नप के दमकल विभाग द्वारा समय-समय पर दिए गए निर्देशों का पालन न होने से अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न उपस्थित हो रहे हैं। यह एक प्रकार से अस्पताल में उपचारार्थ दाखिल मरीजों तथा उनके परिजनों के साथ खिलवाड़ है। भविष्य में किसी अनहोनी का डर बना हुआ है। इस ओर जिलाधिकारी ने स्वयं ध्यान देने की मांग अब जोर पकड रही है।
उल्लेखनीय है कि जिला अस्पताल की इमारत क्रमांक 2 में क्ष-किरण विभाग है। यहां कृष्णा डायग्नोस्टिक केंद्र शुरू किया गया है। परंतु केंद्र की फायर स्प्रिंकलर लाइन निर्माण कार्य के दौरान तोड़ दी गई। पाइप तोड़ते समय नप दमकल विभाग व अस्पताल प्रशासन को भी अंधेरे में रखा गया। तब से उक्त फायर लाइन के स्प्रिंकलर पाइप से मोटर पंप नहीं जोड़ा गया है।
गत ढाई वर्षों से यह काम अधूरा है। इस संदर्भ में बार-बार कृष्णा डायग्नोस्टिक तथा जिला अस्पताल प्रशासन को पत्र जारी किए गए, परंतु अब तक इस गंभीर समस्या का किसी प्रकार का स्थायी हल नहीं निकाला गया है। अस्पताल की इमारतों में लगी फायर मशीनें एक प्रकार से शो-पीस बनी हुई हैं। अमरावती की घटना के बाद अस्पताल प्रशासन हड़बड़ाकर नींद से जागा। सोमवार को जिला शल्य चिकित्सक ने स्वयं इमारत की फायर यंत्रणा का निरीक्षण किया।
फायर स्प्रिंकलर लाइन पूर्ववत जोड़ने के संदर्भ में नप के दमकल विभाग अधिकारी ने आग प्रतिबंधक उपाययोजना 2006 व 2009 के उल्लंघन के संदर्भ में दो बार पत्राचार किया है। 23 अप्रैल 2026 तथा 11 जून 2026 को जिला अस्पताल को पत्र जारी किए गए। इसमें फायर स्प्रिंकलर लाइन दुरुस्त कर इसकी रिपोर्ट पेश करने को कहा गया। परंतु अस्पताल प्रशासन ने इन पत्रों को कचरे की टोकरी दिखाने का आरोप है। इन पत्रों की प्रतियां जिलाधिकारी तथा आपदा प्रबंधन विभाग को भी भेजी गई है़।
सीएस डॉ. राजसिंग पवार ने बताया कि ‘‘जिला अस्पताल में लगी फायर यंत्रणा पर ध्यान दिया जा रहा है। जरूरी उपाययोजना की जा रही है। संपूर्ण यंत्रणा का निरीक्षण किया जा रहा है।’’
राष्ट्रीय भवन संहिता 2016 तथा प्रतिबंधक व जीवनसंरक्षक कानून 2006 के नियमानुसार जिले की सभी सरकारी, व्यावसायिक व शैक्षणिक इमारतों में फायर यंत्रणा लगी है या नहीं, इसकी जांच की जाती है। जिला अस्पताल की इमारत में पहले भी दो बार आगजनी की घटना सामने आ चुकी है। इसके बाद समय-समय पर अस्पताल प्रशासन से पत्राचार कर सूचना दी गई। परंतु अब तक यंत्रणा सुचारु तरीके से कार्यान्वित नहीं की गई। खामियों के कारण अस्पताल की यंत्रणा को एनओसी नहीं दी गई। भविष्य में कोई अनहोनी होती है तो अस्पताल प्रशासन जिम्मेदार रहेगा। निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो इमारत को सील कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी, ऐसा वर्धा नप के दमकल विभाग प्रमुख अशोक लोखंडे व दमकल अधिकारी पद्मनाभ पुल्लरवार ने बताया।