पांच दिवसीय कार्यसप्ताह की मांग पर बैंक हड़ताल, वर्धा में कामकाज ठप; आम नागरिक परेशान
Wardha Bank Strike: 5 दिवसीय कार्यसप्ताह की मांग को लेकर UFBU के आह्वान पर देशव्यापी बैंक हड़ताल हुई। वर्धा में करीब एक हजार कर्मचारियों की भागीदारी से 500 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन प्रभावित हुए।
- Written By: अंकिता पटेल
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Bank Employees Protest: वर्धा पांच दिवसीय कार्यसप्ताह को तत्काल लागू करने की मांग को लेकर यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स द्वारा मंगलवार, 27 जनवरी को देशव्यापी हड़ताल के कारण सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों का कामकाज पूरी तरह प्रभावित रहा।
इस हड़ताल में देशभर के लगभग 18 लाख बैंक कर्मचारी शामिल हुए। नौ बैंक कर्मचारी एवं अधिकारी संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले यूएफबीयू ने यह निर्णय 23 जनवरी 2026 को मुख्य श्रम आयुक्त के साथ हुई सुलह बैठक में कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकलने के बाद लिया।
8 मार्च 2024 को इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के साथ हुए 12वें द्विपक्षीय समझौते में पांच दिवसीय कार्यसप्ताह पर सहमति बनी थी, लेकिन 22 माह बीतने के बावजूद केंद्र सरकार द्वारा अब तक अधिसूचना जारी नहीं की गई है।
सम्बंधित ख़बरें
सिंहस्थ कुंभ मेले के अवसर पर जिला निवेश परिषद, आयुक्त कुशवाह ने दिए तैयारियों के निर्देश
शिंदे का शब्द ही आखिरी, बाकी प्रवक्ताओं से पूछें, गठबंधन की बयानबाजी और पंजाब CM विवाद पर फडणवीस के कड़े तेवर
मुंबई में मजदूर दिवस पर गरजे भाई जगताप, बोले-काले कानूनों के खिलाफ लड़ाई तेज होगी
येवला में साकार होगा अत्याधुनिक नमो उद्यान, मंत्री छगन भुजबल ने किया भूमिपूजन
वर्धा जिले में भी यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स के आह्वान पर आंदोलन किया गया, जिले के लगभग एक हजार बैंक कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल हुए, जिससे करीब 500 करोड़ रुपये से अधिक के बैंकिंग लेनदेन ठप होने का अनुमान है।
हड़ताल का सबसे अधिक असर आम नागरिकों पर पड़ा, क्योंकि पूरे दिन बैंकिंग सेवाएं बाधित रहीं। 24 जनवरी से बैंक बंद रहने से कई एटीएम भी खाली हो गए हैं।
वर्धा में बैंक कर्मियों ने बैंक ऑफ इंडिया के जोनल कार्यालय पश्चात स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य ब्रांच के सामने जोरदार नारेबाजी कर प्रदर्शन किया और रैली भी निकाली।
आंदोलन में वैभव लहाने, वैभव लोखंडे, अनिल रक्ताडे, प्रणय भारती, यशवंत पांडे, निखिल इंगोले सहित विभिन्न बैंकों के कर्मचारी शामिल हुए।
1 दिन के वेतन का त्याग कर आंदोलन को मजबूर कर्मी
हड़ताल के कारण आम जनता को हुई असुविधा के लिए बैंक कर्मचारी खेद प्रकट करते है, लेकिन इसके लिए पूरी तरह केंद्र सरकार जिम्मेदार है। सरकार की अनावश्यक देरी के कारण मजबूरन बैंक कर्मचारियों को अपना एक दिन का वेतन त्याग कर आंदोलन करना पड़ रहा है।
-वैभव लहाने, जोनल सेक्रेटरी, BOI अधिकारी संगठन
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स की हड़ताल
- देशभर के लगभग 18 लाख बैंक कर्मी शामिल हुए
- पांच दिवसीय कार्यसप्ताह को तत्काल लागू करने की मांग
- केंद्र सरकार द्वारा अब तक अधिसूचना जारी नहीं
- पूरे दिन बैंकिंग सेवाएं रही बाधित
- अनेक ATM रहे ‘कैशलेस’
भविष्य में तीव्र आंदोलन की दी गई चेतावनी
बैंक संगठनों का कहना है कि बैंकिग क्षेत्र में लगातार बढ़ता कार्यभार, गंभीर स्टाफ की कमी और बिगड़ता कार्य-जीवन संतुलन कर्मचारियों के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।
इससे ग्राहक सेवा की गुणवता और बैंकों की समस कार्यक्षमता पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। इस देशव्यापी हड़ताल में विविध संगठनों ने एकजुट होकर सरकार से शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की।
यह भी पढ़ें:-‘35 डेज’ में दर्ज वो शाम, जब अजित पवार का बदला मूड बना राजनीतिक संकेत
संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि मांगों की अनदेखी की गई तो भविष्य में और अधिक व्यापक तथा तीव्र आंदोलन किया जाएगा। बैंक संगठनों ने यह भी उल्लेख किया कि आरबीआई, बीमा कंपनियों, राज्य एवं केंद्र सरकार के कार्यालयों में प्रत्येक शनिवार अवकाश होता है, जबकि बैंकों को यह सुविधा अब तक नहीं दी गई है।
