वर्धा में इंसानियत शर्मसार! 2 महीने में मिले 3 बेसहारा नवजात; सोनोग्राफी और गर्भपात केंद्रों पर उठे सवाल!
Wardha Newborn Abandoned Case: वर्धा में 2 महीने में मिले 3 नवजात! स्वास्थ्य विभाग के 'सब ठीक है' के दावों पर उठे सवाल। सोनोग्राफी और गर्भपात केंद्रों की भूमिका की हो रही चर्चा।
- Written By: प्रिया जैस
वर्धा न्यूज
Sonography Centers Wardha: वर्धा जिले में शासन द्वारा मान्यता प्राप्त 71 सोनोग्राफी केंद्र और 47 गर्भपात केंद्र संचालित हैं। हाल ही में स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई जांच में इन केंद्रों की व्यवस्था संतोषजनक बताई गई है। हालांकि पिछले दो महीनों में जिले के अलग-अलग स्थानों पर तीन नवजात शिशु परित्यक्त अवस्था में मिलने की घटनाओं के बाद कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।
जिले में अवैध गर्भपात, लिंग चयन जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए पीसीपीएनडीटी कानून लागू है। इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय निगरानी समिति गठित की गई है। समिति की सचिव के रूप में जिला शल्य चिकित्सक समय-समय पर सोनोग्राफी और गर्भपात केंद्रों का निरीक्षण भी करते हैं।
इसके पहले भी जिले में एक अस्पताल में अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सख्ती बरती थी और राज्य स्तर पर विशेष जांच अभियान चलाया गया था। गत वर्ष तथा चालू वर्ष में भी नियमित निरीक्षण किए जाने की जानकारी अधिकारियों ने दी है। जांच में सभी केंद्रों की कार्यप्रणाली नियमों के अनुरूप बताई गई है।
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इसके बावजूद हाल में सामने आई तीन घटनाओं ने प्रशासन और समाज दोनों को चिंतित किया है। संबंधित मामलों में अब तक शिशुओं की माता-पिता की पहचान या प्रसव स्थल की स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस द्वारा जांच जारी है।
2 महीनों में नहीं हुई कोई गृह प्रसूति
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में प्रत्येक माह सरकारी और निजी अस्पतालों में लगभग 1,100 से 1,200 प्रसव होते हैं। पिछले दो महीनों में जिले में एक भी गृह प्रसूति दर्ज नहीं की गई है। ऐसे में परित्यक्त अवस्था में नवजात शिशुओं का मिलना गंभीर विषय माना जा रहा है।
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अविवाहित गर्भवती की अलग से दर्ज नहीं होती जानकारी
स्वास्थ्य विभाग शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण करता है। यदि किसी अविवाहित महिला का प्रसव अस्पताल में होता है तो उसकी भी औपचारिक नोंद ली जाती है। हालांकि ऐसी गर्भवती महिलाओं का अलग से कोई स्वतंत्र अभिलेख तैयार नहीं किया जाता, ऐसा सूत्रों ने बताया।
नवजात शिशु कहां मिले?
27 दिसंबर 2025 को वर्धा जिला सामान्य अस्पताल के एक शौचालय में एक नवजात बालिका मृत अवस्था में मिली। पश्चात 21 जनवरी 2026 को वर्धा शहर के समीप जुनापानी चौक क्षेत्र में एक जीवित नवजात बालिका मिली, जिसकी बाद में उपचार के दौरान नागपुर के अस्पताल में मृत्यु हो गई। वहीं 14 फरवरी 2026 को देवली तहसील के सोनेगांव (बाई) क्षेत्र में एक नवजात बालक मृत अवस्था में मिला। तीनों मामलों में पुलिस जांच जारी है और संबंधित जानकारी जुटाने का प्रयास किया जा रहा है।
