प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Wardha Water Management: पुलगांव वर्धा नदी के तट पर बसे पुलगांव शहर में ग्रीष्मकाल की शुरुआत से पहले ही जलापूर्ति व्यवस्था चरमराती नजर आ रही है। बीते 9 दिनों में नगर के विभिन्न क्षेत्रों में मात्र 3 बार पानी की आपूर्ति की गई, जिससे नागरिकों में रोष व्याप्त है।
नगरपालिका प्रशासन ने पैनल बोर्ड में खराबी को बाधा का कारण बताते हुए सफाई दी है। हालांकि, नागरिकों का कहना है कि आए दिन मोटर, पंप हाउस या पैनल बोर्ड में तकनीकी खराबी का हवाला देकर जिम्मेदारी से बचने का प्रयास
किया जा रहा है।
पूर्व में एक टंकी से जलापूर्ति होने के कारण शहर में दिन में दो बार पानी दिया जाता था। बाद में यह आपूर्ति घटकर एक बार रह गई और फिर एक दिन के अंतराल से पानी मिलने लगा।
पिछले कुछ वर्षों से नदी में जलस्तर कम होने और बिजली आपूर्ति बाधित रहने के कारण दो दिन के अंतराल से जलापूर्ति की जा रही है। पूर्व राज्य मंत्री कांचले के प्रयासों से शहर में दूसरी पानी की टंकी का निर्माण कराया गया।
पहली टंकी की भंडारण क्षमता 9 लाख लीटर तथा दूसरी की 12 लाख लीटर है। दोनों टंकियों में पानी भरकर शहर के विभिन्न क्षेत्र गांधी चौक, हिंगनघाट फेल, नागपुर फेल, चूड़ी मोहल्ला, रेलवे स्टेशन चौक, देखनी फेल, ठाकोर मोहल्ला और हरीराम नगर में आपूर्ति की जाती है।
करीब 25 लाख लीटर जलापूर्ति को नियमित और सुचारू बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीकी व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की जा रही है। नागरिकों का मानना है कि पंप हाउस का ठेका जिस ठेकेदार को दिया गया है, उसकी जिम्मेदारी है कि समय-समय पर तकनीकी खामियों को दूर कर नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करे।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि एक ओर देश में तकनीकी सुविधाएं तेजी से विकसित हो रही हैं, वहीं पुलगांव नगरपालिका पुरानी व्यवस्था पर निर्भर है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि नगरवासियों को नियमित जलापूर्ति से आखिर कब तक वंचित रखा जाएगा। फिलहाल, पानी की अनियमित आपूर्ति शहर में चर्चा और चिंता का विषय बनी हुई है।