वर्धा में बारिश के साथ बढ़ा सर्पदंश का खतरा: साढ़े 3 साल में 1931 लोग हुए शिकार, स्वास्थ्य केंद्रों पर ASV अलर
Wardha Snake Bite Cases: वर्धा जिले में पिछले साढ़े तीन वर्षों में सर्पदंश के 1,931 मामले सामने आए हैं, जिनमें 8 लोगों की जान गई है। सभी सरकारी अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम दवा उपलब्ध कराई गई है।
- Written By: केतकी मोडक
वर्धा में वर्षवार सर्पदंश एवं मृत्यु तालिका (सोर्स- AI)
Anti-Snake Venom Availability In Wardha: बारिश के मौसम में रेंगने वाले जीव-जंतु अधिक सक्रिय हो जाते हैं। इनमें विषैले सांप खेतों, झाड़ियों के साथ-साथ सड़कों पर भी दिखाई देने लगते हैं। ऐसे में सर्पदंश की घटनाओं में भी वृद्धि होती है। वर्धा जिला स्वास्थ्य प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साढ़े 3 वर्षों में जिले में सर्पदंश के 1,931 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 8 लोगों की मृत्यु हुई है। हालांकि समय पर उपचार मिलने से बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाई जा सकी। बरसात शुरू होते ही सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जून से अक्टूबर के बीच सबसे अधिक मामले सामने आते हैं, जबकि अन्य महीनों में इनकी संख्या अपेक्षाकृत कम रहती है।
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि सर्पदंश की स्थिति में बिना देर किए नजदीकी अस्पताल पहुंचें, क्योंकि जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी स्नेक वेनम (ASV) उपलब्ध है। जिले में सांपों की 21 प्रजातियां पाई जाती हैं, जबकि महाराष्ट्र में अब तक 52 प्रजातियों का पंजीकरण किया गया है। इनमें से 12 प्रजातियां अत्यंत विषैली मानी जाती हैं। इनमें नाग, मण्यार, फुरसे और घोणस प्रमुख हैं, जो वर्धा जिले में भी पाए जाते हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिला अस्पताल, 2 उपजिला अस्पतालों और 8 ग्रामीण अस्पतालों में 1,681 सर्पदंश के मरीजों का पंजीकरण हुआ है। वहीं जिला परिषद स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत आने वाले 31 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में 250 मामले दर्ज किए गए। कुल मिलाकर इस अवधि में 8 लोगों की मौत हुई।
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सर्पदंश होने पर तुरंत अस्पताल पहुंचें
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि सर्पदंश होने पर किसी भी प्रकार के अंधविश्वास या घरेलू उपचार के बजाय तुरंत प्राथमिक उपचार लेकर नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचें। समय पर एंटी स्नेक वेनम (ASV) दिए जाने से अधिकांश मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है। विभाग के अनुसार, जिले के सभी उपजिला अस्पतालों, ग्रामीण अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) तथा स्वास्थ्य उपकेंद्रों में पर्याप्त मात्रा में ASV इंजेक्शन उपलब्ध हैं।
तालिका: वर्षवार सर्पदंश एवं मृत्यु रिपोर्ट (2023-2026)
| वर्ष | सर्पदंश | मृत्यु |
| 2023 | 529 | 06 |
| 2024 | 561 | 02 |
| 2025 | 752 | 00 |
| 2026 | 89 | 00 |
| कुल | 1931 | 08 |
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ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक होती हैं घटनाएं
विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के दौरान सांपों के बिलों में पानी भर जाने से वे बाहर निकल आते हैं और सुरक्षित स्थान की तलाश में इधर-उधर भटकते हैं। इसी दौरान खेतों में काम करने वाले किसानों और ग्रामीणों के संपर्क में आने से सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। जून और जुलाई के दौरान जिले के कुछ हिस्सों में सर्पदंश से मौत के मामले भी सामने आए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी घटनाएं अधिक होती हैं और कई बार समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण जान भी चली जाती है।
