शक्तिपीठ संवाद यात्रा को मिल रहा किसानों का साथ! वर्धा के धोत्रा में अभिनेता भरत गणेशपुरे ने लोगों से की बात
Shaktipeeth Highway Project: वर्धा में किसानों का समर्थन मिल रहा है। संवाद यात्रा के दौरान किसानों ने समृद्धि महामार्ग से मिले लाभ साझा किए और नए प्रोजेक्ट से मिलेंगे रोजगार, विकास व बेहतर कनेक्टिविटी
- Written By: सूर्यप्रकाश मिश्र | Edited By: आलोक उमाकृष्ण
शक्तिपीठ संवाद यात्रा की फोटो (सोर्सः फाइल फोटो)
Shaktipeeth Expressway Farmers Support: को नई गति प्रदान करने वाले ‘महाराष्ट्र राज्य शक्तिपीठ महामार्ग’ प्रोजेक्ट को भारी प्रतिसाद मिलता दिख रहा है। इस हाइवे की शुरुआत वर्धा जिले से होने के कारण विदर्भ में विकास की संभावना और मज़बूत हो गई हैं। राज्य के बड़े धार्मिक, आर्थिक और इंडस्ट्रियल सेंटर्स को जोड़ने वाला यह हाईवे भविष्य की तरक्की का नया रास्ता होगा।
महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MSRDC) ने इस प्रोजेक्ट के बारे में जागरूकता एवं लोगों से संवाद के उद्देश्य से ‘शक्तिपीठ संवाद यात्रा’ शुरू की है। इस यात्रा का पहला चरण हाल ही में वर्धा ज़िले के धोत्रा में संपन्न हुआ। इस दौरान जाने-माने एक्टर और निवेदक भरत गणेशपुरे ने लोगों और और किसानों से बातचीत की।
किसानों ने शेयर किए अनुभव
संवाद यात्रा को स्थानीय किसानों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। जो किसान शक्ति पीठ हाईवे के लिए ज़मीन देने को तैयार हैं, साथ ही जिन किसानों को समृद्धि हाईवे से फ़ायदा हुआ है, उन्होंने अपने अनुभव शेयर करते हुए नए प्रोजेक्ट को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया है। समृद्धि हाईवे से हुए विकास पर अपना अनुभव शेयर करते हुए, कई किसानों ने नए मौकों, ज़मीन की बढ़ी हुई कीमतों और रोज़गार पैदा होने का ज़िक्र किया, जिससे शक्ति पीठ हाईवे को लेकर उनकी उम्मीद और मज़बूत हुई है।
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इस कार्यक्रम में वर्धा डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर वनमथी सी., MSRDC के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर लक्ष्मीनारायण मिश्रा, चीफ़ इंजीनियर साहेबराव सुरवसे भी मौजूद थे। उन्होंने किसानों से सीधे बातचीत की और प्रोजेक्ट के बारे में डिटेल में जानकारी देते हुए संभावित फ़ायदों के बारे में बताया।
समृद्धि से भी लंबा हाइवे
MSRDC के जॉइंट एमडी लक्ष्मीनारायण मिश्रा ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार अभी शक्ति पीठ हाईवे के ज़रिए समृद्धि हाईवे से भी लंबा हाईवे बनाने की ओर अग्रसर है। समृद्धि हाईवे 701 km लंबा था जबकि शक्तिपीठ हाईवे 856 km लंबा है। शक्ति पीठ हाईवे सिर्फ़ विदर्भ से ही नहीं बल्कि मराठवाड़ा से भी गुज़रता है।
समृद्धि हाईवे का शुरू में कुछ विरोध हुआ था। लेकिन, किसानों के फ़ायदे के लिए उन्हें पांच गुना मुआवज़ा दिया गया। किसानों ने उस पैसे से और ज़मीन ली। शक्ति पीठ के लिए वर्धा और यवतमाल ज़िलों के सेक्शन 18 पूरी हो चुकी है। ज़मीन अधिग्रहण के अवॉर्ड का प्रोसेस अभी चल रहा है। जो किसान ज़मीन देने के लिए तैयार हैं उन्हें तुरंत पेमेंट कर दिया जाएगा।
क्या कहा किसानों ने
इस दौरान किसान सुभाष घायवत ने कहा कि वर्धा ज़िले के पडेगांव इलाके में मेरी साढ़े तीन एकड़ ज़मीन है। साढ़े तीन एकड़ में से ढाई एकड़ खेत शक्तिपीठ हाईवे में जा रहा है। इस वजह से मेरी ज़मीन दो हिस्सों में बंट रही है। हमारी ज़मीन की जॉइंट मेज़रमेंट के लिए अधिकारी आए थे। हमने सभी अधिकारियों का पूरा सहयोग किया।
किसान एड महेंद्र धोटे ने कहा कि पांढरकवडा में मेरी 16 एकड़ खेती थी। 8 एकड़ जमीन समृद्धि हाइवे में गई और उस पैसे से मुझे 30 एकड़ जमीन मिल गई। पेड़,कुआं तबेला और आपकी जमीन से जाने वाली पाइपलाइन का भी मुआवजा सरकार दे रही है। उसका सीधा फायदा किसानों को हो रहा है।
एक और किसान प्रशांत इंगले ने कहा कि समृद्धि हाइवे में जब उनकी जमीन गई तो उन्हें 82 लाख हेक्टेयर के हिसाब से 3 करोड़ रुपए मिले। यह प्रक्रिया अत्यंत पारदर्शी होने से किसान समृद्ध हुए। शक्तिपीठ हाइवे प्रोजेक्ट का फायदा भी किसानों के विकास में होगा।
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तो मेरे बेटे को नौकरी!
किसान मंगेश भुसे ने कहा कि पड़ेगांव में मेरा खेत है। मेरे कुल खेत में से साढ़े तीन एकड़ खेत शक्तिपीठ हाईवे में जा रहा है। मेरी ज़मीन की जॉइंट मेज़रमेंट भी हो गया। जब अधिकारी मेज़रमेंट के लिए मेरे खेत पर आए, तो मैंने उन सभी का स्वागत किया। मुझे निश्चित रूप से खुशी है कि इतना बड़ा हाईवे हमारे गांव से होकर गुजर रहा है।
