विकसित भारत का सपना, युवाओं का संकल्प: राष्ट्रपति मुर्मू ने वर्धा दीक्षांत समारोह में फूंकी नई ऊर्जा

President Droupadi Murmu: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वर्धा में युवाओं को 'विकसित भारत 2047' का मंत्र दिया। हिंदी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मातृभाषा और महिला सशक्तिकरण पर दिया विशेष जोर।
President Droupadi Murmu gave the mantra of 'Viksit Bharat 2047' to the youth in Wardha. At the convocation ceremony of the Hindi University, she emphasized the importance of the mother tongue and women's empowerment.
वर्धा दीक्षांत समारोह में द्रौपदी मुर्मू (सौजन्य-नवभारत)
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President Droupadi Murmu's Visit to Wardha: भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए युवाओं की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह‍्वान किया कि वे अपनी व्यक्तिगत प्रगति के साथ-साथ देश को आत्मनिर्भर, सशक्त और विकसित बनाने में योगदान दें। राष्ट्रपति वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के छठवें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रही थीं।

इस अवसर पर राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर तथा विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा उपस्थित थीं। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि वर्धा वह ऐतिहासिक भूमि है, जहां महात्मा गांधी ने निवास किया और विकसित भारत का सपना देखा। उस सपने को साकार करने में आज के विद्यार्थियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने पदवी प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई दी और पदक विजेताओं का विशेष रूप से अभिनंदन किया। शिक्षा का उपयोग केवल व्यक्तिगत उन्नति के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास के लिए भी किया जाना चाहिए। उन्होंने गांधीजी के आत्मनिर्भरता के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि नवाचार, मूल्य आधारित शिक्षा और सामाजिक प्रतिबद्धता के माध्यम से ही विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

भारतीय भाषाओं के सम्मान पर दिया जोर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) ने भारतीय भाषाओं के संरक्षण और सम्मान पर विशेष बल देते हुए कहा कि मातृभाषा का गौरव बनाए रखना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अन्य भाषाएं सीखना महत्वपूर्ण है, लेकिन अपनी भाषा को प्राथमिकता देना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने अपने सेवाग्राम दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां महात्मा गांधी के सादगीपूर्ण जीवन, राष्ट्रप्रेम और समाज सेवा से उन्हें प्रेरणा मिली।

महिलाओं की भागीदारी पर विशेष जोर

राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2047 में देश की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होंगे। स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं का योगदान महत्वपूर्ण रहा है और अब विकसित भारत के निर्माण में भी युवतियों को युवाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे आना चाहिए। इस दीक्षांत समारोह में छात्राओं ने अधिक पदक प्राप्त किए, जो एक सकारात्मक संकेत है।

राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए : राज्यपाल

इस अवसर पर राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों को सदाचार, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व का पालन करते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए। उन्होंने डिजिटल युग में हिंदी भाषा की बढ़ती भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने देवेंद्र फडणवीस की ओर से विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र में रोजगारोन्मुख बदलाव ला रही है। साथ ही नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री की संकल्पनाओं के अनुरूप नई शिक्षा नीति को लचीला, कौशल आधारित और विद्यार्थी केंद्रित बनाया जा रहा है।

पदवी वितरण और कार्यक्रम की रूपरेखा

दीक्षांत समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) ने विभिन्न संकायों के आठ विद्यार्थियों को प्रतीकात्मक रूप से डिग्रियां प्रदान कीं। कार्यक्रम का प्रास्ताविक कुलपति प्रो। कुमुद शर्मा ने किया, जिसमें उन्होंने विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों, अनुसंधान गतिविधियों और छात्र विकास कार्यक्रमों की जानकारी दी।

इस अवसर पर विधायक दादाराव केचे, विशेष पुलिस महानिरीक्षक संदीप पाटील, पूर्व सांसद रामदास तडस, जिल्हाधिकारी वान्मथी सी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी पराग सोमण, जिला पुलिस अधीक्षक सौरभ कुमार अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में प्राध्यापक, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। यह समारोह न केवल विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का अवसर था, बल्कि विकसित भारत के निर्माण के लिए नई ऊर्जा और संकल्प का संदेश भी लेकर आया।

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