एलपीजी वितरकों को हाई कोर्ट से झटका, 100% डिजिटल बुकिंग और DAC अनिवार्यता के खिलाफ याचिका वापस लेनी पड़ी
Nagpur High Court News: नागपुर हाई कोर्ट ने एलपीजी वितरकों की डिजिटल बुकिंग के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से इनकार किया। कोर्ट ने प्रक्रिया का पालन न करने पर फटकार लगाई, जिसके बाद याचिका वापस ली गई।
- Written By: रूपम सिंह
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: AI)
Nagpur LPG Distributors: राज्य भर में फैले एलपीजी वितरकों के एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (याचिकाकर्ता) को हाई कोर्ट में उस समय निराशा हाथ लगी जब अदालत ने 100% डिजिटल बुकिंग और ‘डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड’ (डीएसी) की अनिवार्यता के खिलाफ दायर उनकी याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत के सख्त रुख के बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली।
क्या है पूरा मामला?
महाराष्ट्र के LPG डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए गैस कंपनियों द्वारा लागू किए गए 100% डिजिटल बुकिंग और डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) के नियम को चुनौती दी थी। वितरकों की दलील थी कि 100% डिजिटल बुकिंग पूरी तरह से उनके नियंत्रण में नहीं है।
इसके अलावा, डिलीवरी कोड पूरी तरह से सॉफ्टवेयर और नेटवर्क पर निर्भर करता है और यदि नेटवर्क में कोई तकनीकी खराबी आती है या ग्राहक किसी कारणवश कोड नहीं दे पाते हैं तो वितरक ग्राहकों को गैस सिलेंडर की आपूर्ति नहीं कर सकते। वितरकों ने यह भी बताया कि उन्हें ये निर्देश केवल वाट्सएप (WhatsApp) संदेशों के माध्यम से दिए गए थे।
सम्बंधित ख़बरें
अमरावती कांड के आरोपी का बर्थडे मनाना पड़ा भारी, वीडियो वायरल होते ही नपे 3 पुलिसकर्मी, SP ने किया सस्पेंड
नागपुर एयरपोर्ट पर कैब चालकों का आंदोलन जारी, कलेक्टर के आश्वासन के बाद भी नहीं बनी बात, यात्री हुए बेहाल
अशोक चव्हाण के बयान पर कांग्रेस का तीखा पलटवार, कहा- पिता की विरासत और विचारधारा से विश्वासघात किया
नॉट रिचेबल सहर शेख वानखेड़े में देख रही थी मैच! पुलिस स्टेशन पहुंचकर पिता बोले करारा जवाब मिलेगा
अदालत ने लगाई फटकार
- सुनवाई के दौरान अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए याचिकाकर्ता LPG डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन को सीधे अदालत आने पर फटकार लगाई।
- न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने हैरानी जताते हुए सवाल किया कि वितरकों ने इस समस्या के संबंध में पहले संबंधित अधिकारियों या विभाग को कोई लिखित ज्ञापन क्यों नहीं दिया।
- अदालत का कहना था कि बिना किसी पूर्व लिखित शिकायत या सरकारी माध्यम से बातचीत
किए सीधे हाई कोर्ट में याचिका दायर करना उचित प्रक्रिया नहीं है। - इसके साथ ही अदालत ने वाट्सएप पर दिए गए निर्देशों की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठाए और कहा कि ऐसे निर्देशों के लिए कोई आधिकारिक अधिसूचना या सर्कुलर होना चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि आदेश किसी उच्च अधिकारी की ओर से है या नहीं।
- अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिका के साथ ऐसा एक भी दस्तावेज संलग्न नहीं है जो यह साबित करे कि वितरकों ने पहले प्रशासन से गुहार लगाई थी।
ये भी पढ़ें :-नागपुर एयरपोर्ट पर कैब चालकों का आंदोलन जारी, कलेक्टर के आश्वासन के बाद भी नहीं बनी बात, यात्री हुए बेहाल
प्रक्रिया का पालन नहीं
अदालत ने याचिकाकर्ता को चेतावनी दी कि बिना उचित प्रक्रिया का पालन किए दायर की गई इस याचिका को तत्काल खारिज किया जा सकता है। इसे देखते हुए याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
अदालत ने याचिका को वापस लिया हुआ मानकर निस्तारित कर दिया है और वितरकों को यह छूट दी है कि वे डिजिटल बुकिंग और नेटवर्क से जुड़ी अपनी सभी 10 समस्याओं का एक विस्तृत लिखित ज्ञापन पहले संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करें।
