

Hotel Restaurant Gas Crisis: राज्य सरकार के अन्न, नागरी आपूर्ति एवं ग्राहक संरक्षण विभाग ने व्यावसायिक एलपीजी गैस सिलेंडर वितरण के लिए नया सुधारित प्राधान्यक्रम घोषित किया है। इस सूची में होटल, रेस्टोरेंट, स्वीटमार्ट, केटरिंग और मेस संचालकों का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। परिणाम स्वरूप शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में होटल-रेस्टोरेंट व्यवसायियों में तीव्र नाराज़गी है।
कई स्थानों पर गैस की अनुपलब्धता के कारण व्यावसायिकों को मजबूर होकर पारंपरिक कोयले की सिगड़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है। सरकार के इस निर्णय से भीड़भाड़ के मौसम में अनेक व्यवसाय संकट में फंस गए हैं। गैस सिलेंडर न मिलने से कई होटल बंद होने की कगार पर हैं।
वहीं, नागरिकों, विद्यार्थियों और कामगारों की बड़ी संख्या भोजन के लिए मेस और होटलों पर निर्भर रहती है। लेकिन प्राधान्यक्रम सूची से इन सेवाओं को बाहर कर देने से व्यावसायिक सिलेंडर प्राप्त करना लगभग असंभव हो गया है। गैस सिलेंडर वितरण का अधिकार राज्य सरकार के पास है।
नई सूची के अनुसार, महामंडल, औषध उद्योग, कॉर्पोरेट व औद्योगिक कैंटीन, दुग्ध उद्योग और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को 50 प्रतिशत गैस आपूर्ति की अनुमति दी गई है। परंतु आम नागरिकों के दैनिक जीवन से जुड़े होटल, रेस्टोरेंट और मेस को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया गया है। इससे व्यवसायियों के सामने बड़ा प्रश्न खड़ा हो गया है, गैस सिलेंडर के बिना व्यवसाय कैसे चलाया जाए।
गैस सिलेंडर की कमी के कारण कई होटल संचालकों ने अपने प्रतिष्ठानों में पारंपरिक कोयले की सिगड़ियों और चूल्हों का उपयोग शुरू कर दिया है। एक ओर सरकार प्रदूषण मुक्त वातावरण का आह्वान कर रही है, वहीं दूसरी ओर गैस वितरण की त्रुटियों के चलते व्यवसायियों को धुएं में घिरकर काम करना पड़ रहा है।
इंधन और घरेलू गैस की भारी कमी होने की अफवाहों ने अकोट शहर में गुरुवार को बड़ी खलबली मचा दी। इन अफवाहों के चलते नागरिकों ने पेट्रोल पंपों पर एक साथ भीड़ लगा दी।
नतीजतन शहर में वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। प्रशासन और इंधन वितरकों ने स्पष्ट किया है कि शहर में पेट्रोल, डीज़ल और गैस का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। नागरिकों से घबराने की आवश्यकता नहीं है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर विश्वास न करें और संयम बनाए रखें।