

Nagpur LPG Distributors: राज्य भर में फैले एलपीजी वितरकों के एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (याचिकाकर्ता) को हाई कोर्ट में उस समय निराशा हाथ लगी जब अदालत ने 100% डिजिटल बुकिंग और 'डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड' (डीएसी) की अनिवार्यता के खिलाफ दायर उनकी याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत के सख्त रुख के बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली।
महाराष्ट्र के LPG डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए गैस कंपनियों द्वारा लागू किए गए 100% डिजिटल बुकिंग और डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) के नियम को चुनौती दी थी। वितरकों की दलील थी कि 100% डिजिटल बुकिंग पूरी तरह से उनके नियंत्रण में नहीं है। इसके अलावा, डिलीवरी कोड पूरी तरह से सॉफ्टवेयर और नेटवर्क पर निर्भर करता है और यदि नेटवर्क में कोई तकनीकी खराबी आती है या ग्राहक किसी कारणवश कोड नहीं दे पाते हैं तो वितरक ग्राहकों को गैस सिलेंडर की आपूर्ति नहीं कर सकते। वितरकों ने यह भी बताया कि उन्हें ये निर्देश केवल वाट्सएप (WhatsApp) संदेशों के माध्यम से दिए गए थे।
अदालत ने याचिकाकर्ता को चेतावनी दी कि बिना उचित प्रक्रिया का पालन किए दायर की गई इस याचिका को तत्काल खारिज किया जा सकता है। इसे देखते हुए याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
अदालत ने याचिका को वापस लिया हुआ मानकर निस्तारित कर दिया है और वितरकों को यह छूट दी है कि वे डिजिटल बुकिंग और नेटवर्क से जुड़ी अपनी सभी 10 समस्याओं का एक विस्तृत लिखित ज्ञापन पहले संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करें।