वर्धा हिंदी यूनिवर्सिटी में बवाल! आंदोलनकारी 6 छात्रों की हॉस्टल-कैंपस में एंट्री बैन, जानें पूरा मामला

Hindi University Wardha: वर्धा के महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में 2 महीने से जारी छात्र आंदोलन के बीच प्रशासन ने 6 छात्रों के कैंपस व हॉस्टल प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
university administration banned six protesting students
वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय का द्वार और विरोध जताते छात्र(सोर्स: नवभारत)
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MGAHV Wardha Student Protest: वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय (MGAHV) में बुनियादी शैक्षणिक सुधारों और छात्रहित की मांगों को लेकर जारी आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया है। बीते 8 जुलाई 2026 से लगातार धरने पर बैठे विद्यार्थियों के साथ संवाद स्थापित करने के बजाय विश्वविद्यालय प्रशासन पर दमनात्मक रुख अपनाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। करीब दो महीने से चल रहे इस आंदोलन के बीच प्रशासन ने आज बड़ा एक्शन लेते हुए 6 प्रमुख छात्र नेताओं को विश्वविद्यालय परिसर और हॉस्टल से पूर्णतः प्रतिबंधित करने का फरमान जारी कर दिया है।

FIR के बाद हॉस्टल से बेदखली

कार्रवाई से उद्वेलित छात्रों का कहना है कि अपनी जायज मांगों के लिए आवाज उठाने वाले विद्यार्थियों पर प्रशासन ने पहले पुलिस में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई और अब उन्हें हॉस्टल व परिसर से बेदखल कर दिया है।

छात्रों ने बताया आवाज दबाने की साजिश

आंदोलनकारी छात्र राजेश सारथी ने प्रशासनिक रवैये पर तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि वर्ष 2022 से रुकी हुई PhD प्रवेश प्रक्रियाओं को शुरू करने, बंद शैक्षणिक विभागों को पुनः संचालित करने, केंद्रीय पुस्तकालय का रीडिंग रूम खोलने और हॉस्टल मेस में गुणवत्तापूर्ण भोजन जैसी मूलभूत मांगों पर बात करने की जगह पुलिस और सुरक्षा बलों के जरिए छात्रों की आवाज दबाई जा रही है।

6 छात्रों पर बैन वापस लेने की मांग

प्रशासनिक आदेश के तहत निरंजन कुमार, रामचंद्र, राकेश अहिरवार, राहुल और राजेश कुमार यादव समेत छह छात्रों पर कैंपस प्रवेश का पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। छात्रों का स्पष्ट कहना है कि किसी भी केंद्रीय विश्वविद्यालय में शांतिपूर्ण विरोध और असहमति को अपराध की तरह देखना पूरी तरह से गैर-लोकतांत्रिक है। इस तानाशाहीपूर्ण रवैये से आंदोलन खत्म होने वाला नहीं है, बल्कि छात्रों का गुस्सा और भड़क सकता है।

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सार्वजनिक संवाद और लिखित समाधान का अल्टीमेटम

आंदोलनरत विद्यार्थियों ने वर्धा हिंदी विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि सभी 6 छात्रों पर लगाए गए प्रतिबंध तुरंत प्रभाव से हटाए जाएं और दर्ज एफआईआर वापस ली जाए। छात्रों ने चेतावनी दी है कि कुलपति और उनका प्रशासनिक अमला छात्र प्रतिनिधियों के साथ तत्काल सार्वजनिक संवाद (Public Dialogue) आयोजित करे तथा सभी लंबित शैक्षणिक मांगों पर लिखित व समयबद्ध समाधान प्रस्तुत करे, अन्यथा यह आंदोलन और व्यापक रूप लेगा।

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