मक्का को घोषित MSP 2400 रुपये प्रति क्विंटल की गारंटी क्यों नहीं? (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Wardha News: “जब इथेनॉल को 71.32 रुपये प्रति लीटर की MSP की सरकारी गारंटी मिल सकती है, तो मक्का को घोषित MSP 2400 रुपये प्रति क्विंटल की गारंटी क्यों नहीं?” यह सवाल किसान नेता विजय जावंधिया ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और कृषि मंत्री शिवराजसिंह चौहान से पत्र के माध्यम से पूछा है। जावंधिया ने कहा कि 2019 में देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किसान की आय बढ़ाने के लिए उसे ‘ऊर्जा दाता किसान’ बनाने का संकल्प जताया था। इसी उद्देश्य से पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण की नीति बनाई गई। नितिन गडकरी ने भी इस नीति का जोरदार समर्थन और प्रचार किया।
शुरुआत में केवल शक्कर कारखानों को इथेनॉल उत्पादन हेतु प्रोत्साहन दिया गया, लेकिन धीरे-धीरे अनाज, चावल और मक्का से भी इथेनॉल बनाने को बढ़ावा दिया गया। सरकार ने इथेनॉल उत्पादन संयंत्रों के लिए सब्सिडी योजना लागू की और साथ ही 71.32 रुपये प्रति लीटर की निश्चित खरीद कीमत (MSP) की गारंटी भी दी। इसी गारंटी के कारण मक्का की मांग बढ़ी, और पिछले वर्ष किसानों को एमएसपी से भी अधिक दाम 2400 रुपये प्रति क्विंटल तक मिले। इससे प्रोत्साहित होकर बिहार से लेकर कर्नाटक तक किसानों ने मक्का की खेती का रकबा बढ़ाया।
लेकिन इस वर्ष स्थिति उलट गई है। उत्पादकता बढ़ने के बावजूद किसानों को घोषित MSP नहीं मिल रही है। आज उन्हें मक्का 1100 से 1900 रुपये प्रति क्विंटल में बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। देशभर में यही स्थिति है।
“जब भारत सरकार इथेनॉल खरीदने के लिए 71.32 रुपये प्रति लीटर की गारंटी दे सकती है, तो मका किसानों को घोषित 2400 रुपये प्रति क्विंटल MSP की गारंटी क्यों नहीं?
क्या ज्यादा उत्पादन करना कोई अपराध है?” उन्होंने आरोप लगाया कि स्वतंत्र भारत में यही होता रहा है। किसान उत्पादन बढ़ाता है और सरकार दाम गिरा देती है।
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जावंधिया ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों का परिणाम आज किसान भुगत रहा है। भारत रत्न डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन ने हमेशा कहा था कि किसान को उत्पादन लागत + 50% लाभ मिलना चाहिए। लेकिन वास्तविकता यह है कि इस वर्ष खरीफ की एक भी फसल को MSP नहीं मिल रही ऊर्जा दाता किसान भी संकट में हैं जावंधिया ने सवाल किया कि “क्या यही है सबका साथ, सबका विकास?”