प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Wardha Rural Water Supply Action Plan: वर्धा प्रतिवर्ष गर्मी के मौसम में संभावित जलसंकट से निपटने के लिए जिला प्रशासन द्वारा कृति प्रारूप तैयार कर विभिन्न उपाययोजना कार्यों पर विशेष जोर दिया जाता है। गत वर्ष जिला परिषद के ग्रामीण जलापूर्ति विभाग ने जिलेभर में जलसंकट निवारण की 468 उपाययोजना के कार्य पूर्ण करने का दावा किया है।
वर्ष 2024-25 के लिए ग्राम पंचायतों की ओर से कुल 918 उपाययोजना कार्यों को पूर्ण करने की मांग की गई थी। इनमें से 500 से अधिक गांवों के कृति प्रारूप में दर्ज 560 कायों को जिलाधिकारी द्वारा मंजूरी प्रदान की गई थी।
इनमें से विभिन्न प्रकार के 468 उपाययोजना कार्य सफलतापूर्वक पूरे किए गए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पहले चरण में 3 गांवों के लिए 3 उपाययोजना कार्य, दूसरे चरण में 239 गांवों के लिए 449 कार्य तथा तीसरे चरण में 260 गांवों के लिए 413 उपाययोजना प्रस्तावित किए गए थे। जिले के कुल 501 गांवों में जलसंकट की आशंका जताई गई थी।
प्रशासन का दावा है कि आवश्यकता के अनुसार उपाययोजना कार्य किए गए, हालांकि कई स्थानों पर इन कार्यों में देरी होने की
शिकायतें सामने आई हैं। समय पर कार्य पूर्ण न होने के कारण कुछ गांवों में नागरिकों को गंभीर जलसंकट का सामना करना पड़ा, वहीं कुछ स्थानों पर कृत्रिम जलसंकट की स्थिति भी देखी गई।
उपाययोजना कार्यों के अंतर्गत नए बोरवेल, निजी कुओं का अधिग्रहण, सार्वजनिक कुओं का गहरीकरण तथा जलापूर्ति योजनाओं की विशेष मरम्मत एवं दुरुस्ती के कार्यों पर जोर दिया गया। ग्राम पंचायतों द्वारा विभिन्न कार्यों की मांग की गई थी, किंतु कई गांवों में मांग के अनुरूप उपाययोजना कार्य नहीं हो पाने की जानकारी सामने आई है।
वर्तमान वर्ष में भी गर्मी के मौसम के दौरान जिले के अनेक गांवों में जलसंकट की आशंका बनी हुई है। इससे निपटने के लिए कृति प्रारूप तैयार करने का कार्य प्रगति पर है। सभी तहसीलों से रिपोर्ट मंगाई गई है।
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जिले की सभी आठ पंचायत समितियों के लिए जिला परिषद के ग्रामीण जलापूर्ति विभाग द्वारा संयुक्त कृति प्रारूप तैयार कर मजूरी के लिए भेजा जाएगा। प्रशासन ने आगामी दिनों में जलसंकट से निपटने हेतु कृति प्रारूप को शीघ्र स्वीकृति मिलने की संभावना जताई है।
वर्ष 2024-25 के दौरान जिलाधिकारी द्वारा स्वीकृत 560 उपाययोजना कार्यों में से 468 कार्य पूर्ण किए गए, इनमें 85 नई बोरवेल का निर्माण, 75 निजी कुओं का अधिग्रहण, 71 सार्वजनिक कुओं का गहरीकरण तथा जलापूर्ति योजनाओं की विशेष मरम्मत के 237 कार्य शामिल हैं। इन सभी उपाययोजना के कार्यों पर कुल 21 करोड़ 40 लाख 83 हजार रुपये का अनुमानित व्यय किया गया है।