वर्धा. राज्य सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक का उत्पादन, आयात, भंडारण, वितरण, बिक्री तथा उपयोग पर पाबंदी लगाई है़ नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए है़ इसके बावजूद प्लास्टिक का धड़ल्ले से उपयोग होते दिखाई दे रहा है़ नगर परिषद प्रशासन ने शहर में 17 अक्टूबर से प्लास्टिक बंदी मुहिम आरंभ की जानेवाली है.
दिवाली के त्यौहार के मद्देनजर की जानेवाली कार्रवाई से अधिकांश व्यापारियों में दहशत का माहौल है़ पिछले कुछ वर्षों से शहर में प्लास्टिक पाबंदी के निर्देशों पर पूर्णत: अनदेखी हुई है़ 50 मायक्रॉन से कम जाड़ी की प्लास्टिक का धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है़ सब्जी, फल, खाद्यपदार्थों के ठेले तथा दूकानों में भी प्लास्टिक का उपयोग हो रहा है़ इसमें अन्य प्रतिबंधित प्लास्टिक वस्तुओं का भी समावेश है़ जुलाई महीने में नगर परिषद की ओर से शहर के कुछ हिस्सों में कार्रवाई भी की गई़ इस दौरान 4 लोगों पर कार्रवाई कर 150 किलो प्लास्टिक जब्त किया गया़ किंतु, कार्रवाई में निरंतरता नहीं रहने के कारण कोई फायदा नहीं हुआ.
आइस्क्रीम खाने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले प्लास्टिक के चम्मच, प्लेट्स, चाय व पानी पीने के कप, ग्लासेस, काटे, चम्मच, चाकू, स्ट्रा, ट्रे आदि 100 मायक्रान से कम प्लास्टिक अथवा पीवीसी बैनर कचरा व नर्सरी के लिए उपयोग में लाई जाने वाली थैलियां छोड़कर, सभी कम्पोस्टेबल प्लास्टिक की थैलियां, डिश बाउल, कंटेनर, सजावटी प्लास्टिक व पॉलिस्टीरिन थर्माकोल, मिठाई, निमंत्रण पत्रिका, सिगरेट पैकेट के ऊपर का प्लास्टिक आवरण, प्लास्टिक के झंडों का समावेश है़ पैकेजिंग के लिए 50 माइक्रान से मोटी प्लास्टिक का उपयोग करना अनिवार्य है़.
प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग करते पाए जाने पर पहली बाद अगर कार्रवाई होती है तो 5,000 रुपए का जुर्माना तथा दूसरी बार प्लास्टिक का उपयोग करते पाए जाने पर 10,000 रुपयों का जुर्माना ठोका जाएगा़ तीसरी बार अगर प्लास्टिक कार्रवाई में पकड़े जाने पर 25,000 रुपयों का जुर्माना व 3 महीने जेल की सजा का प्रावधान किया गया है.
शहर में एक ओर प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग करने वालों की संख्या बड़ी है़ जबकि दूसरी ओर कुछ लोग स्वयंस्फूर्ति से प्लास्टिक बंदी को सहयोग कर रहे है़ कागज के स्ट्रा, थैलियों का उपयोग उन्होंने शुरू किया है़ साथ ही कपड़े की थैलियां भी बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध की जा रही है.