वर्धा: कर्ज के जाल और फसल बर्बादी ने ली एक और किसान की जान; 60 वर्षीय दिलीप कडू ने खेत में की आत्महत्या
Wardha Farmer Suicide: वर्धा जिले के बोदड गांव में 60 वर्षीय किसान दिलीप कडू ने कथित तौर पर कर्ज और फसल नुकसान की चिंता से खेत में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस जांच जारी है।
- Written By: अंकिता पटेल
वर्धा किसान आत्महत्या, कर्जग्रस्त किसान, (सोर्स: सौजन्य AI)
Wardha Farmer Death: वर्धा जिले के आर्वी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम बोदड में कर्ज से परेशान एक किसान द्वारा आत्महत्या करने का मामला सामने आया है। मृतक की पहचान 60 वर्षीय दिलीप उत्तम कडू के रूप में हुई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिलीप कडू गांव परिसर में ही खेती करते थे, लेकिन पिछले कुछ समय से कृषि संकट की मार झेल रहे थे
कर्ज का बोझ और फसल की विफलता दिलीप कडू ने अपनी खेती की जरूरतों को पूरा करने के लिए बैंक से कर्ज लिया था। हालांकि, मौसम की अनिश्चितता और अन्य कारणों से इस बार फसल नहीं हो पाई, जिससे वह भारी आर्थिक तंगी में आ गए थे।
सूत्रों के अनुसार, बैंक का कर्ज चुकाने की चिंता उन्हें दिन-रात सता रही थी। इसी मानसिक तनाव के चलते उन्होंने 5 जून की शाम खेत में ही फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। जब ग्रामीणों को इस बात का पता चला, तो पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
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विदर्भ में कृषि संकट के साथ मानसिक स्वास्थ्य चुनौती भी गहराई
विदर्भ और महाराष्ट्र में गहराता संकट यह घटना महाराष्ट्र और विशेष रूप से विदर्भ क्षेत्र में व्याप्त कृषि संकट (Agrarian distress) को फिर से रेखांकित करती है। आंकड़ों के अनुसार, भारत में 1995 से 2023 के बीच लगभग 3.9 लाख किसानों ने आत्महत्या की है, जिसमें महाराष्ट्र का हिस्सा सबसे अधिक है।
छोटे और सीमांत किसान कर्ज, जलवायु परिवर्तन और संस्थागत सहायता की कमी के कारण एक ‘मौन मानसिक स्वास्थ्य संकट’ (Silent mental health crisis) से जूझ रहे हैं महाराष्ट्र के कई जिलों में सूखे और फसल विफलता के वर्षों में लगभग 40% किसानों में अवसाद के लक्षण देखे गए हैं।
किसान आत्महत्या के बाद कर्ज और परिस्थितियों की जांच शुरू
पुलिस की कार्रवाई घटना की सूचना मिलते ही आर्वी पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा किया। पुलिस ने इस मामले में आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज कर लिया है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि किसान पर कुल कितना कर्ज था और किन परिस्थितियों ने उन्हें इस चरम कदम के लिए प्रेरित किया।
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सहायता और बचाव की दरकार विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों के मानसिक स्वास्थ्य को संबोधित करने के लिए केवल कर्ज माफी काफी नहीं है। इसके लिए ‘एटमियता’ (Atmiyata) जैसी सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य योजनाओं और फसल बीमा (PMFBY) के प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता है, ताकि किसानों में सुरक्षा और आत्मविश्वास का भाव पैदा किया जा सके।
