दिवाली से पहले शरद गुट में फूटने लगे पटाखे, जिलाध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर छिड़ गया जोरदार युद्ध
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव और दिवाली की तैयारी जोरो पर है। दिवाली से पहले ही शरद गुट में पटाखे फूटने लगे है और जिलाध्यक्ष पद के लिए संग्राम छिड़ गया है।
- Written By: प्रिया जैस
शरद पवार (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Wardha NCP-SP Politics: दिवाली के त्यौहार में सभी पटाखों की आतिशबाजी करते हैं। राजनीति में ऐसी आतिशबाजी से नेता स्वयं को बचाते है, परंतु एनसीपी-एसपी गुट इससे स्वयं को अलग नहीं रख पाया है। दिवाली पर एनसीपी शरद पवार गुट में एक दूसरे पर बम फोड़ने शुरू हो गये है। जिसके पीछे कारण जिलाध्यक्ष की नियुक्ति बताया गया। सहकार गुट बनाम सांसद ऐसा विवाद गत कुछ दिनों से उभरकर का आया है।
कांग्रेस के पूर्व विधायक अमर काले ने अचानक एनसीपी-एसपी गुट में प्रवेश कर वर्धा लोस से चुनाव लड़ा। जिसमें वह विजयी भी हुए। कुछ दिनों सहकार गुट व सांसद के बीच के संबंध ऊपरी तौर पर सुमधुर रहे। परंतु आग अंदर सुलग रही थी। सांसद अमर काले व अतुल वांदिले की जोड़ी व उन्हें पूर्व मंत्री अनिल देशमुख का सहयोग के कारण सहकार गुट की बेचैनी बढ़ रही थी।
सहकार गुट का महत्व हुआ कम
पार्टी के प्रमुख निर्णय अनिल देशमुख व सांसद काले करने के कारण सहकार गुट का महत्व कम होता दिख रहा था। बीते कुछ वर्ष से सहकार गुट जिले की राजनीति में नाममात्र रह चुका है। अपना वजूद बचाने के चक्कर में यह गुट निरंतर कले विरोधी भूमिका लेता रहा है। डेढ़ वर्ष पूर्व पार्टी में सहकार गुट की चलती थी, परंतु काले सांसद होने के बाद वरिष्ठ नेताओं ने काले को महत्व देना आरंभ किया।
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चुनाव के दौरान भी सहकार गुट हुआ था आक्रामक
लोकसभा व विधानसभा चुनाव के दौरान भी सहकार गुट आक्रामक हुआ था। विधानसभा चुनाव के दौरान सहकार नेता के पुत्र ने बगावती तेवर अपना लिए थे। परंतु बाद में उनके तेवर फीके पड़ गये थे। यह गुट निरंतर बागी तेवर दिखाता है। कितु समय आने पर अपनी तलवार म्यान कर देता है। ऐसा अब तक का अनुभव रहा है।
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यही बात सहकार गुट के पेट में हजम नहीं हुई। हाल ही में सांसद अमर काले ने पूर्व मंत्री अनिल देशमुख के सहयोग से जिलाध्यक्ष पद पर अतुल वांदिले की नियुक्ति की। जिसके बाद यह विवाद खुलकर सामने आया है। सहकार नेता ने वांदिले की नियुक्ति को लेकर पूर्व मंत्री अनिल देशमुख व सांसद अमर काले तंज कसते हुए पार्टी मनमानी तरीके से चलाने का आरोप लगाया है।
एनसीपी जब वजूद नहीं था तब हमने साथ दिया आज पार्टी के निर्णय लेते समय हमें नजरअंदाज किया जाता है। यह बात हम कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे ऐसी चेतावनी भी सहकार नेता ने दी है। इस संदर्भ में अंतिम निर्णय दिवाली के बाद लिया जाएगा, ऐसा उन्होंने बताया।
