Wardha News: जिले में कपास की बुआई प्रारंभ, मृग नक्षत्र पर टिकी किसानों की नजरें
शनिवार को खरांगणा परिसर के कुछ किसानों ने कपास की बुआई शुरू कर दी है, तो कुछ किसान बीज, खाद की खरीददारी में जुटे हैं। सभी किसानों की मृग नक्षत्र पर नजरें टिकी हुई हैं।
- Written By: आंचल लोखंडे
वर्धा जिले में कपास की बुआई को प्रारंभ। (सौजन्यः सोशल मीडिया)
वर्धा: इस वर्ष बारिश समय पर होने के आसार थे। मई माह में रुक-रुक कर जिले में बारिश हुई। जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है, ऐसे किसानों ने कपास की बुआई प्रारंभ कर दी है। रविवार, 8 जून से मृग नक्षत्र प्रारंभ होने जा रहा है। ऐसे में शनिवार को खरांगणा परिसर के कुछ किसानों ने कपास की बुआई शुरू कर दी है, तो कुछ किसान बीज, खाद की खरीददारी में जुटे हैं। सभी किसानों की मृग नक्षत्र पर नजरें टिकी हुई हैं। 6 जून से मौसम ने करवट बदली है। खरीफ की बुआई के लिए जरूरी बीज, खाद व कीटनाशक दवाइयां लेने किसान जुगाड़ कर रहे हैं।
मृग नक्षत्र के मुहूर्त पर कुछ किसान कपास की बुआई करते हैं। इस वर्ष खरीफ मौसम में 4 लाख 31 हजार 731.73 हेक्टेयर पर बुआई का नियोजन है। इसमें कपास 2 लाख 19 हजार 986.20 हेक्टेयर व सोयाबीन 1 लाख 32 हजार 696.17 हेक्टेयर एवं अन्य फसलों का समावेश है। पिछले साल शुरुआती दिनों में अच्छी बारिश हुई। इसके बाद जून माह में बारिश ने ब्रेक दे दिया। पश्चात जुलाई में धुव्वाधार वर्षा से भारी नुकसान हुआ था। फसल बह गई थी। काफी नुकसान किसानों को उठाना पड़ा। इस वर्ष किसान पूरी सतर्कता बरत रहे हैं। वहीं जब तक 100 मिमी बारिश नहीं होती तब तक बुआई न करें। जल्दबाजी कर किसान नुकसान न उठाएं, ऐसा आह्वान कृषि विभाग ने किया है।
खेती उपज को नहीं मिल रहा भाव
गर्मी के मौसम में बड़े पैमाने पर किसानों ने तिल फसल की बुआई की थी। कुछ किसानों ने तिल की फसल निकाल कर घर में रखी है, जबकि कुछ किसान तिल फसल की छटनी कर रहे हैं। खरीफ के मुहाने पर फसल घर में पड़ी होने से इसे बेचने के लिए किसान मार्केट में ला रहे हैं, परंतु इसे निजी व्यापारी गारंटी मूल्य से भी कम भाव दे रहे हैं। इससे किसानों का लागत खर्च भी निकल पाना मुश्किल हो गया है।
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बीज व खाद की खरीददारी पर जोर
खरांगणा के किसान आकाश कठाणे ने कहा कि मृग नक्षत्र पर कपास की बुआई करना लाभदायी साबित हो सकता है। मृग नक्षत्र पर बोई गई फसल उत्पादन में अच्छी रहती है। मृग नक्षत्र पर फिलहाल दो एकड़ में कपास की बुआई की है। बारिश अच्छी हुई तो सोयाबीन की भी बुआई आरंभ कर देंगे। सिंचाई की सुविधा होने से हमने कपास की बुआई शुरू कर दी है।
राज्य के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश की संभावना
बता दें कि राज्य में मानसून के प्रवेश के बाद मई में जमकर बारिश हुई थी। उसके बाद बारिश ने विराम ले लिया है। इस बीच, राज्य के कुछ हिस्सों में एक बार फिर बारिश दिखाई दी है। राज्य के पालघर, ठाणे, रायगढ़, रत्नागिरी, पुणे, नासिक, जलगांव, बुलढाणा, अमरावती, वाशिम, अकोला, यवतमाल, चंद्रपुर, गढ़चिरौली, बीड, छत्रपति संभाजीनगर, हिंगोली, परभणी, नांदेड़, लातूर, धाराशिव, सोलापुर, अहमदनगर, धुले, जालना जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। इस बीच 13 से 18 जून तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है।
