बोर टाइगर प्रोजेक्ट के दैत्यगढ़ में भीषण आग से 34.89 हेक्टेयर वन क्षेत्र स्वाहा; दुर्लभ वन संपदा खाक
Wardha Bor Tiger Project: बोर टाइगर प्रोजेक्ट के दैत्यगढ़ क्षेत्र में लगी भीषण आग से करीब 34.89 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। इस आग में भारी मात्रा में दुर्लभ और औषधीय पेड़-पौधे जलकर खाक हो गए।
- Written By: रूपम सिंह
बोर टाइगर प्रोजेक्ट (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
Bandhavgarh Tiger Reserve Daityagarh Forest Fire: बोर टाइगर प्रोजेक्ट क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला दैत्यगढ़ इलाका गांवों और बोर व्याघ्र प्रकल्प के बीच प्राकृतिक सुरक्षा कवच के रूप में जाना जाता है। यह क्षेत्र वन्यजीवों और प्राकृतिक संपदा की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन हाल ही में इसी दैत्यगढ़ क्षेत्र में लगी भीषण आग ने बड़े पैमाने पर वन संपदा को नुकसान पहुंचाया है।
आग अब भले ही पूरी तरह नियंत्रित हो चुकी हो, लेकिन इसके कारण लगभग 34.89 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है, जिससे पर्यावरण को भारी क्षति पहुंची है। इस नुकसान की आधिकारिक पुष्टि बोर टाइगर प्रोजेक्ट प्रशासन ने भी की है। दैत्यगढ़ क्षेत्र में धधक रही आग ने सूखी घास और वन संपदा को अपनी चपेट में
लेते हुए विकराल रूप धारण कर लिया था। 21 मई को स्थिति गंभीर होने पर बोर टाइगर प्रोजेक्ट के बफर क्षेत्र के अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल मौके पर बुलाया गया। न्यू बोर और हिंगणी बफर क्षेत्र के वन परिक्षेत्र अधिकारियों और कर्मचारियों ने गुरुवार देर रात तक आग पर काबू पाने के लिए अथक प्रयास किए। कर्मचारियों की कड़ी मेहनत से आग पर नियंत्रण पाने में सफलता मिली, हालांकि आग बुझाने के दौरान कुछ कर्मचारियों की तबीयत भी बिगड़ गई थी।
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इसके बावजूद अधिकारी और कर्मचारी लगातार क्षेत्र की निगरानी करते रहे, जिससे बाद में आग पूरी तरह बुझाने में सफलता मिली। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि आग से उमरविहिरी बीट के नवरगांव राउंड में लगभग 8.09 हेक्टेयर, नवरगांव उत्तर बीट के नवरगांव राउंड में 9.80 हेक्टेयर तथा मेट बीट के नवरगांव राउंड में करीब 17.09 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है।
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वास्तविक कारणों की जांच में जुट गया प्रशासन
इस आग में विशेष रूप से शाकाहारी वन्यजीवों के लिए उपयोगी तीन प्रकार की घास, औषधीय गुणों से भरपूर भेरा, तेंदू और नीम जैसे महत्वपूर्ण वृक्ष बड़ी संख्या में जलकर नष्ट हो गए, जिससे पर्यावरण को अपूरणीय क्षति हुई है। वहीं, अब बोर व्याघ्र प्रकल्प प्रशासन आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच में जुट गया है।
आग प्राकृतिक कारणों से लगी या किसी ने जानबूझकर लगाई, इसकी जानकारी जुटाने के लिए वर्धा अधिकारी और कर्मचारी गुप्त रूप से जांच-पड़ताल कर रहे है। प्रशासन इस मामले के हर पहलू की गंभीरता से जांच कर रहा है।
