

Hinganghat Soybean Price Hike: राज्यभर में खरीफ सीजन की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो चुकी हैं, लेकिन इस वर्ष सोयाबीन बुवाई क्षेत्र में कमी आने की संभावना जताई जा रही है। बाजार में विभिन्न कंपनियों के सोयाबीन बीज बिक्री के लिए उपलब्ध हैं, लेकिन अपेक्षित मांग नहीं दिख रही है। दूसरी ओर कृषि उपज मंडियों में सोयाबीन की आवक कम होने से पीले सोयाबीन के दामों में भारी उछाल आया है।
हिंगनघाट कृषि उपज मंडी समिति में सोयाबीन का भाव बढ़कर 7,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। सोयाबीन के दामों में आई इस तेजी का सबसे अधिक लाभ उन किसानों और व्यापारियों को हो रहा है, जिन्होंने अच्छी गुणवत्ता वाला सोयाबीन भंडारित कर रखा था। वर्तमान में बढ़ी कीमतों के कारण ऐसे किसानों और व्यापारियों को बेहतर मुनाफा मिल रहा है। इस वर्ष अतिवृष्टि और रोगों के प्रकोप के कारण सोयाबीन फसल को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था। कई किसानों को फसल पूरी तरह नष्ट होने के कारण खेतों में रोटावेटर चलाकर रबी सीजन की तैयारी करनी पड़ी, जबकि कुछ किसानों को प्रति
एकड़ केवल एक-दो बोरी उत्पादन से ही संतोष करना पड़ा। स्थिति और गंभीर तब हो गई जब काले पड़े तथा खराब गुणवत्ता वाले सोयाबीन को निजी व्यापारियों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दरों पर खरीदा। इससे किसानों में नाराजगी देखी गई।
किसानों का मानना है कि उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल सका। इस बीच नाफेड के तहत खरीदी केंद्र भी देर से शुरू किए गए। 15 नवंबर से 5,328 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू हुई, लेकिन तब तक अधिकांश किसान अपना सोयाबीन बेच चुके थे। इसके अलावा नाफेड की जटिल शर्तों के कारण भी खरीदी को अपेक्षित प्रतिसाद नहीं मिला। परिणामस्वरूप अनेक किसानों को 3,500 से 4,000 रुपये प्रति क्विंटल के कम दाम पर ही सोयाबीन बेचना पड़ा।
हिंगनघाट पिछले तीन-चार दिनों में सोयाबीन के दामों में तेजी से वृद्धि हुई है। भाव सीधे 5 हजार रुपये से बढ़कर 7,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। वर्तमान में बाजार में आने वाला अधिकतर सोयाबीन अच्छी गुणवत्ता का होने से 6 हजार से 7,500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच कारोबार हो रहा है।