Pulgaon में किसान आक्रोश फूटा: महाविकास आघाड़ी का भव्य मोर्चा, सरकार को चेतावनी

इस साल महाराष्ट्र में बरसी आसमानी बरसात ने किसानों के साथ ही सरकार की भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऐसे में राज्य सरकार की ओर से jराहत ना मिलने से किसानों में जमकर गुस्सा देखा जा सकता है।
इस साल महाराष्ट्र में बरसी आसमानी बरसात ने किसानों के साथ ही सरकार की भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऐसे में राज्य और केंद्र सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की सहायता ना मिलने से किसानों में जमकर गुस्सा देखा जा सकता है।
किसान आंदोलन (सौ. नवभारत )
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Wardha News In Hindi: इस वर्ष हुई भीषण वर्षा और महाराष्ट्र सरकार की विफल नीतियों के कारण राज्य के किसान गंभीर संकट में हैं। लगातार हो रही वर्षा के चलते खेतों की फसलें पूरी तरह से नष्ट हो गई हैं, जिससे किसान मायूसी और हताशा की स्थिति में पहुंच गए हैं।

राज्य और केंद्र सरकार द्वारा नुकसान का समुचित आकलन न किए जाने और कोई ठोस सहायता न मिलने के कारण किसानों में रोष व्याप्त है। इन्हीं समस्याओं को लेकर महाविकास आघाड़ी द्वारा पुलगांव में एक भव्य जनआक्रोश मोर्चा निकाला गया।

यह मोर्चा स्टेशन परिसर स्थित तिलक चौक से शुरू होकर इंदिरा चौक, गांधी चौक, भगत सिंह चौक होते हुए तहसील कार्यालय तक पहुंचा। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान भाई बैलगाड़ी लेकर मोर्चे में सम्मिलित हुए थे़ मोर्चे के समापन पर तहसील कार्यालय में महाविकास आघाड़ी के विभिन्न घटक दलों के नेताओं ने किसानों की समस्याओं को जोरदार तरीके से उठाया और सरकार को एक निवेदन सौंपा। इसमें किसानों को प्रति एकड़ ₹50,000 की नुकसान भरपाई दी जाए। किसानों के संपूर्ण कर्ज की माफी की जाए। फसल बीमा योजना के तहत किसानों को राहत प्रदान की जाए। राज्य में गिला अकाल घोषित कर 100 प्रतिशत नुकसान की भरपाई की जाए।

आंदोलन में शामिल होने वालों के नाम

इस जनआंदोलन का नेतृत्व पुलगांव के पूर्व नगराध्यक्ष मनीषकुमार साहू, शिवसेना (यूबीटी) के जिलाध्यक्ष आशीष पांडे, एड। विद्याधर माथने, शिवसेना अध्यक्ष संदीप कूचे, सरपंच एवं किसान नेता प्रमोद बीरे, सतीश बोरसे, मोहन नवाले, रामेश्वर वाघ, अमित दढ़गाल, प्रफुल्ल कुंबरे, मिरज ढगे, अमर तीनघासे, प्रांजल येड़े, रमेश सावरकर, राकां-एसपी के श्याम देशमुख, डॉ। मिलिंद थोंबरे, गोविंद दैय्या, आरपीआई के मात्रे आदि ने किया। मोर्चा में बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे, जिन्होंने सरकार से तुरंत सहायता की मांग की और चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो यह आंदोलन और उग्र रूप धारण करेगा।

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