मुंबई: पश्चिम रेलवे के उपनगरों पर लगातार बढ़ रहे रेल यात्रियों के भार को देखते हुए विरार-दहानु रेल लाइन (Virar-Dahanu Rail Line) के चौपदरीकरण की योजना पर काम शुरू है। उल्लेखनीय है कि पश्चिम रेलवे (Western Railway) पर चर्चगेट से विरार (Churchgate to Virar) सबसे व्यस्त उपनगरीय रेल नेटवर्क में से एक है।
विरार (Virar) तक चार रेलवे ट्रैक है, परंतु अब दहानु-पालघर तक तेजी से उपनगरों का विस्तार हुआ हैं। इसे देखते हुए इस मार्ग पर रेल लाइनें बढ़ाए जाने का काम एमआरवीसी (MRVC) के माध्यम से किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि इस बहुउदेशीय कार्य के लिए अक्टूबर, 2019 में जनरल कंसल्टेंट नियुक्त किया गया, जबकि अप्रैल, 2021 में महत्वपूर्ण पुल संख्या 92 और 93 का ठेका दिया गया और पुल संख्या 92 का कार्य प्रगति पर है। वैसे अब तक 11 प्रतिशत काम हुआ है। 15.86 प्रतिशत वित्तीय व्यवस्था हुई है। एमआरवीसी के मुख्य प्रवक्ता सुनील उदासी के अनुसार, दिसंबर 2025 तक काम पूरा करने का लक्ष्य है। दो लॉट में अर्थवर्क और पुलों का ठेका दिया गया और इस मार्ग में 31 छोटे बड़े पुलों पर कार्य प्रगति पर है।
बताया गया कि विरार और वैतरणा स्टेशन के लिए स्टेशन भवन, सर्विस बिल्डिंग, स्टाफ क्वार्टर, प्लेटफॉर्म आदि के निर्माण का ठेका फ़ाइनल कर दिया गया है। वैतरणा और दहानू रोड के बीच के खंड में स्टेशन भवन, सर्विस बिल्डिंग, स्टाफ क्वार्टर, प्लेटफॉर्म आदि के निर्माण के लिए शेष 2 लॉट के लिए निविदा खोली गई और उसका मूल्यांकन किया जा रहा है। एलसी 55ए पर आरओबी के लिए निविदा को अंतिम रूप दिया गया है।
विरार-दहानु रेल मार्ग के विस्तारीकरण में सभी डिजाइन मंजूर हो चुकी है। इसके तहत 2 महत्वपूर्ण पुलों, 16 बड़े और 67 छोटे पुलों सहित 85 ब्रिज को जीएडी ने स्वीकृत किया है। इस पूरी परियोजना पर 3,578 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसका आधा खर्च रेल मंत्रालय और आधा राज्य सरकार वहन करेगी।
इस प्रोजेक्ट के लिए कुल 29.14 हेक्टेयर निजी और 10.26 हेक्टेयर सरकारी भूमि की आवश्यकता है। 22.60 हेक्टेयर निजी और 8.37 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया है। 6.54 हेक्टेयर निजी भूमि और शेष सिडको और एमआईडीसी भूमि का अधिग्रहण प्रक्रियाधीन है। 3.77 हेक्टेयर वन भूमि का अधिग्रहण किया गया है।
समुद्री खाड़ी से होकर गुजरने वाली इस रेल लाइन के लिए मैंग्रोव (24.57 हेक्टेयर) की कटाई शामिल है, इसलिए मैंग्रोव काटने के लिए उच्च न्यायालय की अनुमति भी आवश्यक है। मैंग्रोव काटने की अनुमति के लिए रिट याचिका दायर की गई है। सीआरजेड निकासी के लिए ऑनलाइन आवेदन भी जमा किया गया है। परियोजना का आंशिक संरेखण दहानु तालुका से होकर गुजर रहा है। इसलिए दहानू तालुका पर्यावरण संरक्षण प्राधिकरण (डीटीईपीए) से एनओसी भी मिल चुकी है।