जन्मदिन विशेष: फोटोग्राफर से लेकर मुख्यमंत्री बनने तक, उद्धव ठाकरे ने 20 साल में क्या खोया क्या पाया?
शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे पार्टी के प्रमुख उद्धव ठाकरे आज 64 साल के हुए। एक फोटोग्राफर से अपने करियर की शुरुआत करने वाले उद्धव ठाकरे अनेक बाधाओं को पार करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यंमत्री भी बने।
- Written By: किर्तेश ढोबले
मुंबई: महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे पार्टी के प्रमुख उद्धव ठाकरे आज 64 साल के हुए। उनका जन्म आज ही के दिन 27 जुलाई 1960 को हुआ। एक फोटोग्राफर से अपने करियर की शुरुआत करने वाले उद्धव ठाकरे अनेक बाधाओं को पार करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यंमत्री भी बने। उद्दव ठाकरे आज 64 साल के हो गए, वह पिछले 20 साल से राजनीति में सक्रिय है।
उद्धव ठाकरे को साल 2003 में महाबलेश्वर में शिवसेना के राष्ट्रीय शिविर में पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया। साल 2003 में पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद से उद्धव ठाकरे का राजनीतिक करियर संघर्षपूर्ण रहा है। हालांकि शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे के निधन के बाद पार्टी को सत्ता में लाने में सफल हुए, लेकिन उनके ही कार्यकाल के दौरान पार्टी विभाजित हो गई। आज भी उन्हें पार्टी के अस्तित्व के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
पार्टी में अनुशासन किया लागू
पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद से उन्होंने पार्टी में अनुशासन लागू कर दिया। ठाकरे ने पार्टी को कार्पोरेट तरीके से चलाया। चाल प्रमुख, इमारत प्रमुख, समूह प्रमुख से लेकर शाखा प्रमुख, विभाग प्रमुख, जिला प्रमुख तक एक मजबूत संगठन निर्मान किया। जिसके ही परिणाम आगे चुनाव में नजर आए और उनके पार्टी के कई उम्मीदवार जीत हासिल करने में कामयाब हुए।
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फोटोग्राफी के शौकिन है उद्धव ठाकरे
उद्धव ठाकरे ने अपनी प्राथमिक शिक्षा बालमोहन विद्यामंदीर से पूरी की। इसके बाद सर जेजे कॉलज से उन्होंने आर्ट्स में ग्रैजुएशन किया। ठाकरे को शुरू से ही फोटोग्राफी का शौक था। राजनीति में उतरने से पहले उद्धव मराठी वर्तमानपत्र हिंदू में नौकरी की। साल 2002 में वह सक्रिय राजनीति में आए और नगरपालिका का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
तीन बड़े झटके
कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद से उद्धव ठाकरे को तीन बार बड़े झटके लगे। सबसे पहले साल 2003 में नारायण राणे ने अंदरूनी मतभेदों के कारण पार्टी छोड़ दी। जिसके बाद राज ठाकरे ने साल 2006 में शिवसेना को छोड़ महाराष्ट्र नवनिर्मान सेना की स्थापना की। वहीं उन्हें साल 2022 में तीसरा झटका लगा, जब एकनाथ शिंदे ने शिवसेना पार्टी अपनी होने का दावा किया। इस दौरान ठाकरे के हाथ से पार्टी का नाम और सिंबल दोनों ही चले गए। उसके बाद उनके साथ रहे विधायकों के साथ उन्होंने नई पार्टी बनाई, जिसका नाम शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे है और उन्हें चुनाव आयोग द्वारा पार्टी का सिंबल जलती हुई मशाल मिली।
खुद को साबित किया
पार्टी का विभाजन होने के बाद विरोधियों को लगा की वह हार जाएंगे लेकिन उन्होंने फिर से खुद को साबित करते हुए नई पार्टी बनाई और हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में पार्टी के 9 सांसद को जीत दिलाने में कामयाब हुए। कई लोग कहते थे कि बालासाहेब ठाकरे जैसे नेतृत्व करने की क्षमता सिर्फ राज ठाकरे में ही है। उद्धव ठाकरे कुछ भी नहीं कर पाएंगे। लेकिन उन्होंने धैर्य न खोते हुए खुद को साबित किया।
