महायुती की तस्वीर अधूरी, मुख्यमंत्री के स्वागत में लहराए 2 झंडे तीसरा गायब, जलगांव में राष्ट्रवादी का किनारा

जलगांव से अमळनेर तक सड़क के दोनों ओर भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के बड़े-बड़े स्वागत बैनर लगाए गए हैं। लेकिन आश्चर्यकारक रूप से राष्ट्रवादी कांग्रेस का एक भी बैनर नजर नहीं आया।
महायुती की तस्वीर अधूरी
महायुती की तस्वीर अधूरी (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Published on: 
Updated on: 

जलगांव: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के जलगांव दौरे को लेकर जिले में राजनीतिक सरगर्मी तेज़ हो गई है। हालांकि दौरा महायुती (भाजपा, शिवसेना शिंदे गुट, राष्ट्रवादी अजित पवार गुट) का माना जा रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री के स्वागत में राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) पूरी तरह नदारद नजर आई।

जलगांव से अमळनेर तक सड़क के दोनों ओर भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के बड़े-बड़े स्वागत बैनर लगाए गए हैं। लेकिन आश्चर्यकारक रूप से राष्ट्रवादी कांग्रेस का एक भी बैनर नजर नहीं आया। इससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि "महायुती में फिलहाल सिर्फ 'युती' (भाजपा-शिवसेना की युति) ही बची है" और तीसरा घटक साथी दरकिनार नज़र आ रहा है।

राजनीतिक संदेश गहराता जा रहा है

मुख्यमंत्री फडणवीस का यह दौरा धरणगांव तालुका में स्थित खाज्याजी नाइक स्मारक के उद्घाटन के लिए हो रहा है। खास बात यह है कि इस स्मारक की आधारशिला भी फडणवीस ने ही रखी थी। कार्यक्रम का आयोजन धरणगांव, जो कि शिवसेना (शिंदे गुट) का गढ़ माना जाता है और जिल्हा पालक मंत्री गुलाबराव पाटील का प्रभाव क्षेत्र भी है, में हो रहा है। ऐसे में भाजपा और शिंदे गुट इसे शक्ति प्रदर्शन के अवसर के रूप में देख रहे हैं।

जिले की राजनीति और आदिवासी समाज की भूमिका

चूंकि इस इलाके में आगामी जिला परिषद चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं, ऐसे में धरणगांव का दौरा केवल सांस्कृतिक नहीं, बल्कि राजनीतिक समीकरणों को भी मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। कार्यक्रम में आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों की बड़ी उपस्थिति तय मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बात पर है कि आदिवासी वोट बैंक किस ओर झुकता है, क्योंकि इसका सीधा असर आगामी चुनावों पर पड़ सकता है। शेर की चमड़ी पहनकर भेड़िया…उद्धव पर बरसे शिंदे-फडणवीस, कम ऑन किल मी का दिया जवाब

बैनरबाजी से मिला 'राजनीतिक सन्देश'

मुख्यमंत्री के स्वागत में लगाए गए बैनर्स में जहां भाजपा और शिंदे गुट का झंडा बुलंद दिखा, वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पूरी तरह से गायब रही। इससे महायुती में भीतरखाने चल रही खींचतान और असंतोष की आशंका और भी पुख्ता हो गई है। स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या अजित पवार गुट को जानबूझकर दरकिनार किया गया, या फिर यह उनकी अपनी निष्क्रियता का परिणाम है?

"कोई साथी चुपचाप किनारे खड़ा है!"

मुख्यमंत्री फडणवीस का जलगांव दौरा केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राजनीतिक गठबंधनों की स्थिति, शक्ति संतुलन और आने वाले चुनावों की दिशा को तय करने वाला संकेतक बन गया है। बैनरबाजी के दृश्य ने एक बड़ा संदेश दिया है "महायुती अब 'पूर्ण' नहीं, कहीं कोई साथी चुपचाप किनारे खड़ा है!"

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com