Varun Sardesai On Operation Tiger (डिजाइन फोटो)
Varun Sardesai On Operation Tiger: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर ‘ऑपरेशंस’ की जंग छिड़ गई है। नवी मुंबई में शिवसेना (UBT) के युवा विधायक वरुण सरदेसाई ने एक बड़ा बयान देकर सत्ताधारी महायुति गठबंधन में खलबली मचा दी है। सरदेसाई ने दावा किया है कि न केवल विपक्षी दल, बल्कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के कई सांसद और विधायक भी उनके (ठाकरे गुट) संपर्क में हैं।
यह बयान उस समय आया है जब सत्ताधारी खेमे की ओर से ‘ऑपरेशन टाइगर’ के जरिए उद्धव गुट में बड़ी सेंधमारी के संकेत दिए जा रहे थे। सरदेसाई के इस ‘काउंटर अटैक’ ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है।
हाल ही में शिंदे गुट की सांसद ज्योति वाघमारे ने संकेत दिया था कि उद्धव बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना के कई जनप्रतिनिधि पाला बदलने को तैयार हैं और जल्द ही ‘ऑपरेशन टाइगर’ शुरू होगा। इस पर पलटवार करते हुए वरुण सरदेसाई ने कहा, “संपर्क में तो दोनों तरफ के लोग हैं। उनके (शिंदे गुट) कई बड़े चेहरे हमारे संपर्क में हैं।” सरदेसाई ने नवी मुंबई नगर निगम मुख्यालय में पार्टी कार्यालय के उद्घाटन के दौरान यह सनसनीखेज दावा किया। उन्होंने सत्ताधारी दल पर विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगाया और सवाल किया कि 220 विधायकों का भारी बहुमत होने के बाद भी सरकार इतनी असुरक्षित क्यों है?
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वरुण सरदेसाई ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके गठबंधन पर तीखा व्यंग्य करते हुए पूछा, “आप इतने लालची क्यों हैं? आपके पास खुद की इतनी बड़ी फौज है, फिर भी आप बार-बार दूसरों के ‘बच्चों’ (विधायकों) को अपने पाले में करने के लिए क्यों तड़प रहे हैं?” उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय निकाय चुनावों में धन और शक्ति का दुरुपयोग करने के बावजूद सत्ताधारी दल विपक्ष को खत्म करने की साजिश रच रहा है। सरदेसाई के इस बयान को शिवसेना (UBT) की ओर से अपने कैडर को एकजुट रखने और शिंदे गुट पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
सांसद ज्योति वाघमारे के ‘ऑपरेशन टाइगर’ वाले बयान पर राकांपा (शरद पवार गुट) के नेताओं ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। शशिकांत शिंदे ने वाघमारे पर निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली जाने के बाद सांसदों को जनता के मुद्दों पर बात करनी चाहिए, न कि तोड़-फोड़ की राजनीति पर। उन्होंने आश्चर्य जताया कि जब सरकार के पास प्रचंड बहुमत है, तो फिर विपक्षी दलों को तोड़ने की जरूरत क्यों पड़ रही है? शरद पवार ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखने की बात कही है। महाराष्ट्र की राजनीति अब ‘टाइटर’ और ‘तुतारी’ के बीच के इस शह-मात के खेल में उलझ गई है।