कारगिल से कन्याकुमारी तक रिकॉर्ड दौड़, ठाणे पहुंचे अल्ट्रा रनर कार्तिक जोशी, रोजाना 70 से 80 Km दौड़ रहें हैं

Ultra Marathon Runner Kartik Joshi कारगिल से कन्याकुमारी तक 4,200 किमी की दौड़ में रिकॉर्ड बनाने की ओर बढ़ रहे हैं। 55 दिनों में ठाणे पहुंचे और प्रतिदिन 70-80 किमी दौड़ रहे हैं
Ultra Marathon Runner Kartik Joshi In Maharashtra
धावक कार्तिक जोशी (सोर्सः AI)
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Ultra Marathon Runner Kartik Joshi In Maharashtra: अंतरराष्ट्रीय अल्ट्रा धावक कार्तिक जोशी देश के सबसे चुनौतीपूर्ण रनिंग अभियानों में से एक को पूरा करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। कारगिल से कन्याकुमारी तक 4,200 किलोमीटर की ऐतिहासिक दौड़ के तहत ठाणे पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत किया गया। यह दौड़ केवल एक खेल अभियान नहीं, बल्कि साहस, धैर्य और आत्मविश्वास की मिसाल बन चुकी है।

कार्तिक ने 2 मई को कारगिल वॉर मेमोरियल से अपनी यात्रा शुरू की थी और लगातार 55 दिनों तक दौड़ते हुए महाराष्ट्र पहुंच चुके हैं। इस दौरान उन्होंने रोजाना औसतन 70 से 80 किलोमीटर की दूरी तय की है, जो किसी भी एथलीट के लिए बेहद कठिन चुनौती मानी जाती है।

जोजिला दर्रे से महाराष्ट्र तक

कार्तिक जोशी की यह यात्रा भारत के विविध भौगोलिक क्षेत्रों से होकर गुजर रही है। उन्होंने जोजिला दर्रे जैसे दुर्गम पहाड़ी इलाकों, ऊबड़-खाबड़ रास्तों, राष्ट्रीय राजमार्गों और कई बड़े शहरों को पार करते हुए अपनी दौड़ जारी रखी है। महाराष्ट्र में प्रवेश के बाद मुंबई और ठाणे में आयोजित विशेष रनिंग कार्यक्रमों में उन्होंने स्थानीय धावकों के साथ भाग लिया।

इस दौरान उन्हें खेल प्रेमियों और आम नागरिकों का भरपूर समर्थन मिला। अभियान के दौरान कार्तिक विभिन्न हाई-परफॉर्मेंस रनिंग शूज़ का उपयोग कर रहे हैं, जिससे लंबी दूरी की दौड़ में उन्हें बेहतर सहायता मिल रही है। उनकी इस उपलब्धि को खेल जगत में काफी सराहा जा रहा है।

रिकॉर्ड बनाने का लक्ष्य

कार्तिक जोशी ने कहा कि यह यात्रा उनके जीवन की सबसे कठिन चुनौतियों में से एक है। लगातार कई सप्ताह तक प्रतिदिन लंबी दूरी दौड़ना न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी बेहद कठिन होता है। उन्होंने बताया कि रास्ते में लोगों से मिले उत्साह और समर्थन ने उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। इंदौर निवासी कार्तिक का लक्ष्य इस अभियान को सफलतापूर्वक पूरा कर नया रिकॉर्ड स्थापित करना है। उनकी दौड़ मुंबई, बेंगलुरु और अन्य प्रमुख शहरों से होते हुए कन्याकुमारी तक पहुंचेगी।

यदि यह अभियान निर्धारित समय में पूरा होता है, तो यह देश की सबसे उल्लेखनीय लंबी दूरी की दौड़ों में शामिल हो सकता है। खेल प्रेमी और धावक समुदाय उनकी सफलता के लिए शुभकामनाएं दे रहे हैं।

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