

Ulhasnagar Municipal Corporation: उल्हासनगर महानगर पालिका में स्वीकृत नगरसेवकों की नियुक्ति और 11 सितंबर को प्रस्तावित विशेष महासभा को अचानक स्थगित करने के महापौर और आयुक्त के फैसले पर मुंबई उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। महापौर के पत्र और आयुक्त के फैसले को हाईकोर्ट को खारिज कर दिया हैं।
इस फैसले से जहां भाजपा में खुशी की लहर दिखाई से रही हैं भाजपाइयों ने हाईकोर्ट का आभार व्यक्त किया हैं वहीं शिवसेना को हाईकोर्ट के फैसले से बड़ा झटका लगा हैं। न्यायमूर्ति जी. एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति डॉ. नीला केदार गोखले की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए महापौर और मनपा आयुक्त के महासभा स्थगन संबंधी पत्र को खारिज कर दिया है।
हाईकोर्ट ने प्रशासन को सख्त निर्देश देते हुए 15 दिनों के भीतर यानी 25 सितंबर 2026 तक मनोनीत नगरसेवकों की चुनाव प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया है। भाजपा जिलाध्यक्ष व मनपा गट नेता राजेश वधारिया और सहयोगियों द्वारा अधिवक्ता मोनीष भाटिया के माध्यम से दायर इस याचिका पर आए फैसले से सत्ता पक्ष और प्रशासनिक तंत्र की मनमानी पर विराम लग गया है। उच्च न्यायालय के इस ऐतिहासिक फैसले की खबर मिलते ही भाजपा खेमे और राजनीतिक गलियारों में खुशी की लहर दौड़ गई।
अदालत द्वारा याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाए जाने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं ने जमकर जश्न मनाया। कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर अपनी जीत का इजहार किया और इसे लोकतंत्र तथा नियमों की बड़ी जीत बताया। इस निर्णय के बाद अब 25 सितंबर से पहले स्वीकृत नगरसेवकों की नियुक्ति का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। वहीं उल्हासनगर मनपा की सत्ता में शामिल शिवसेना और भाजपा की आपसी कलह एक बार फिर खुलकर सामने आ गई और शिवसेना-भाजपा का गठबंधन खतरे पड़ता जा रहा हैं।