

Ulhasnagar Antilia Ghat Controversy: ठाणे जिले के उल्हासनगर में उल्हास नदी के अस्तित्व और पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उल्हासनगर कैंप-1, म्हारल गांव स्थित रिजेंसी एंटीलिया इमारत परिसर के पास उल्हास नदी के तट पर करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए कंक्रीट घाट को अब धार्मिक और पर्यटन स्थल घोषित करने की कवायद तेज हो गई है। स्थानीय विधायक कुमार आयलानी द्वारा रखी गई इस मांग के बाद पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
ठाणे जिले के उल्हासनगर कैम्प 1 म्हारल गांव स्थित रिजेंसी एंटिलिया ईमारत संकुल में विधायक कुमार आयलानी के प्रयासों से करोड़ों रुपये फंड और प्रयासों से उल्हास नदी के किनारे 350 मीटर लंबा और 150 मीटर चौड़ा सीमेंट कंक्रीटीकरण करके नदी के पात्र में ही घाट का निर्माण किया जा रहा है।
इस निर्माण पर मई 2025 में ही ठाणे जलसंसाधन विभाग के उपविभागीय अधिकारी द्वारा उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) आयुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था और काम तुरंत रोकने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, सरकारी नोटिस और चेतावनियों को दरकिनार करते हुए घाट का निर्माण कार्य चलता रहा।
हिराली फाउंडेशन की अध्यक्षा दिवंगत सरिता खानचंदानी ने 2 साल पहले उल्हासनगर मनपा प्रशासन को पत्र लिखकर घाट का निर्माण तुरंत रोकने और कार्रवाई की मांग की गई थी। आरोप है कि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सैंकड़ो पेड़ों की कटाई की गई है, नदी के पात्र में खनन, उत्खनन और सीमेंटीकरण के साथ भराव की अनुमति के बगैर बदस्तूर जारी घाट के निर्माण पर कार्रवाई करने की तब मांग भी की गई थी।
उल्हास नदी पर बना एंटीलिया घाटइस विवाद के बीच अब उल्हासनगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक कुमार आइलानी ने इस घाट को पर्यटन स्थल या धार्मिक स्थल घोषित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वहां छठपुजा होती है, गणेश और दुर्गा मुर्ति विसर्जन होता है इसलिए इसे धार्मिक स्थल घोषित किया जाना चाहिए।
एंटीलिया घाट को पर्यटन/धार्मिक स्थल घोषित करने की विधायक द्वारा मांग को 16 सितंबर के दिन हो रही उल्हासनगर मनपा की महासभा में पारित करने हेतु प्रस्तुत किया जा रहा है।
इतने प्रशासनिक विवादों और नियमों के उल्लंघन के बावजूद, विधायक कुमार आयलानी ने तर्क दिया है कि इस घाट पर स्थानीय नागरिक छठ पूजा, गणेश मूर्ति विसर्जन और दुर्गा मूर्ति विसर्जन जैसे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। अतः इसे आधिकारिक रूप से धार्मिक और पर्यटन स्थल घोषित किया जाए। इस मांग का प्रस्ताव 16 सितंबर को उल्हासनगर महानगरपालिका की महासभा में मंजूरी हेतु प्रस्तुत किया जा रहा है।
इस कदम से उल्हास वालधुनी सरिता संवर्धन अभियान के पदाधिकारी और सदस्य उग्र हो गए हैं। पर्यावरण प्रेमियों का स्पष्ट कहना है कि गैर-कानूनी तरीके से नदी का गला घोंटकर बनाए गए ढांचे को 'धार्मिक' या 'पर्यटन' का चोला पहनाना पर्यावरण कानूनों का सीधा उपहास है।