EEZ Regulation 2025 पर मछुआरों का विरोध तेज, आजीविका पर खतरे का आरोप

Bhayandar: ईईजेड मत्स्य पालन नियम 2025 को लेकर महाराष्ट्र के पारंपरिक मछुआरों में रोष देखने मिला है। समिति का आरोप है कि नए नियमों से कॉर्पोरेट को लाभ और छोटे मछुआरों की आजीविका पर खतरा आ सकता है।
Thane News
(प्रतीकात्मक तस्वीर)
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Mira Bhayandar News Update In Hindi: केंद्र सरकार द्वारा देश के पारंपरिक मछुआरों के लिए जारी किए गए "ईईजेड (अनन्य आर्थिक क्षेत्र) में मत्स्य पालन के सतत दोहन नियम, 2025" को लेकर मछुआरा समुदाय में भारी रोष है।

अखिल महाराष्ट्र मछुआरा कार्रवाई समिति ने आरोप लगाया है कि इन नियमों से बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों और पूंजीपतियों को भारतीय समुद्र में कानूनी रूप से प्रवेश का रास्ता मिल गया है।

इससे छोटे पारंपरिक मछुआरों की आजीविका पर खतरा मंडरा रहा है। मीरा भाईंदर और पालघर जिले में बड़ी संख्या में मछुआरे अपनी रोजी-रोटी के लिए समुद्र पर निर्भर हैं। समिति का कहना है कि नया कानून इन समुदायों के अस्तित्व के लिए चुनौती बन गया है।

यह हमारे अस्तित्व की लड़ाई है: संजय कोली

समिति के महासचिव संजय कोली ने कहा कि यह सिर्फ संघर्ष नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व की लड़ाई है। अगर केंद्र सरकार इस अमानवीय और असंवैधानिक अधिसूचना में बदलाव नहीं करती, तो देश भर के तटीय इलाकों में इस अधिसूचना की होली मनाई जाएगी, समिति ने बताया कि देश के 11 समुद्री राज्यों में पारंपरिक मछुआरा संगठनों से संपर्क किया जा रहा है और जल्द ही राष्ट्रव्यापी आंदोलन का ऐलान किया जाएगा।

समिति के अध्यक्ष देवेंद्र टंडेल ने आरोप लगाया कि केंद्र ने पारंपरिक मछुआरों द्वारा दिए गए 22 सुझावों में से किसी को भी शामिल नहीं किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने मछुआरो के अधिकारों, भावनाओं और पीढ़ियों से चली आ रही जीवन शैली से मुंह मोड़ लिया है।

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