12,500 करोड़ की ठाणे रिंग मेट्रो परियोजना का बढ़ा विरोध, पर्यावरण नुकसान को लेकर उठे सवाल
Thane Ring Metro Project को लेकर विरोध तेज हो गया है। पर्यावरणविदों और सामाजिक संगठनों ने मैंग्रोव कटाई, ट्रैफिक दबाव और नागरिकों के विस्थापन को लेकर गंभीर आपत्तियां उठाई हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक
ठाणे रिंग मेट्रो प्रोजेक्ट (सौ. सोशल मीडिया )
Thane Ring Metro Project Update: ठाणे शहर की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने को लेकर राज्य के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अति महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल ठाणे रिंग मेट्रो का विरोध थम नहीं रहा है।
घोडबंदर इलाके में मेट्रो का काम शुरू होने के बाद ‘सिटिजन्स फॉर सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट एक्सपोर्ट’ सहित अन्य संगठनों ने आक्रामक रुख अख्तियार किया है। पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी संस्थाओं का मानना है कि ठाणे शहर में मेट्रो 4 एवं मेट्रो 5 प्रोजेक्ट शुरू है। इसलिए ठाणे रिंग मेट्रो की कोई जरूरत नहीं है।
प्रस्तावित रिंग रोड से पर्यावरण को होगा भारी नुकसान
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने भी इस परियोजना को फिजूलखर्च बताते हुए कहा कि इससे ठाणे के नागरिकों को किसी तरह का लाभ नहीं होगा। विरोध करने वालों का कहना है कि रिंग मेट्रो से पर्यावरण को बहुत नुकसान होगा और बहुत अधिक खुदाई भी होगी।
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पर्यावरणविदों और शहर नियोजन विशेषज्ञों का कहना है ठाणे शहर वासियों को इसकी जरूरत नहीं होने के बावजूद जबरदस्ती इस परियोजना को थोपा जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के लिए पैसे देने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
परियोजना के तहत 22 स्टेशन प्रस्तावित
ठाणे रिंग मेट्रो प्रोजेक्ट के तहत कुल 22 स्टेशन प्रस्तावित हैं। 29 किमी लंबा रिंग मेट्रो का कुछ हिस्सा अंडरग्राउंड और कुछ एलिवेटेड होगा। आरोप है कि घोड़बंदर इलाके में स्टेशनों के लिए बड़ी मात्रा में मैंग्रोव काटे जाएंगे, जिससे पर्यावरण को बहुत नुकसान होगा।
लोकमान्य नगर, रायलादेवी, वागले में स्टेशन बनाते समय नागरिकों के माइग्रेशन की भी एक बड़ी समस्या होगी, क्योंकि इन जगहों पर बड़ी संख्या में लोग रहते हैं। स्कूल, हॉस्पिटल है। सड़कें हमेशा व्यस्त रहती हैं, तो इससे इस क्षेत्र में ट्रैफिक जाम और बढ़ जाएगा।
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रिंग मेट्रो प्रोजेक्ट पर खर्च होंगे 12,500 करोड़ रुपये
- ठाणे रिंग मेट्रो प्रोजेक्ट पर 12,500 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। इस परियोजना को केंद्र सरकार से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। रिंग मेट्रो की प्लानिंग तत्कालीन मनपा आयुक्त संजीव जायसवाल के समय में की गई थी।
- इस पूरे परियोजना की डीपीआर महामेट्रो कंपनी ने तैयार की थी। अब ठाणे के कुछ नौजवान एक साथ आए हैं और उन्होंने ‘सिटिजन्स फॉर सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट एक्सपोर्ट’ नाम के संगठन के जरिए इस प्रोजेक्ट का विरोध शुरू किया है।
- यह प्रोजेक्ट पर्यावरण के लिए कितना नुकसानदायक है और ठाणेकरों को सच में इस प्रोजेक्ट की कितनी जरूरत है, इसको लेकर कैंपेन चला रहे है।
- प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले ही, कुछ पर्यावरणविदों ने इस प्रोजेक्ट पर कुछ जरूरी आपत्तियां उठाई है और इससे अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है।
