Thane court acquittal (सोर्सः सोशल मीडिया)
Thane Court Acquittal: महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक अदालत ने वर्ष 2015 में प्रॉपर्टी डीलर की हत्या से जुड़े मामले में सभी आठ आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में विफल रहा, क्योंकि चश्मदीद गवाह हमलावरों की पहचान नहीं कर सके। मामले के एक अन्य आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एस.बी. अग्रवाल ने शनिवार को दिए अपने आदेश में कहा कि मामले की बुनियाद, यानी हत्यारों की पहचान, ही मूल रूप से त्रुटिपूर्ण थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, प्रॉपर्टी डीलर बंटी प्रधान 13 अप्रैल 2015 को ठाणे में मीरा-भयंदर रोड स्थित एक बार से अपने दोस्तों के साथ बाहर निकल रहे थे। तभी कुछ अज्ञात लोगों ने उन पर गोलियां चला दीं। कई गोलियां लगने से बंटी प्रधान की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके दोस्त सचिन मनोहर विजयकर गंभीर रूप से घायल हो गए।
पुलिस ने शुरुआत में दावा किया था कि यह हमला संपत्ति विवाद का नतीजा था। इस मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), 120-बी (आपराधिक साजिश) और शस्त्र अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
हालांकि, सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि मुखबिर अदालत के समक्ष आरोपियों की पहचान नहीं कर सका। वहीं, जुलेखा शेख समेत अन्य चश्मदीद गवाहों ने गोलियों की आवाज को पटाखों की आवाज समझ लिया था और वे भी हमलावरों की पहचान करने में असमर्थ रहे।
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अदालत ने जितेन ज्वाला, राजेश चौहान, रवींद्र आर्य, जटाशंकर पांडे, मुकेश शेट्टी, यशोदीप नाइक, अजय सिंह और राहुल शर्मा को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। एक अन्य आरोपी मयंक गाला की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। मामले के सात आरोपी पहले ही जमानत पर बाहर थे, जबकि हिरासत में मौजूद राहुल शर्मा को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया गया।
(एजेंसी इनपुट के साथ)