ठाणे के जुपिटर अस्पताल में चमत्कार, बिना ओपन हार्ट सर्जरी माई क्लिप से 73 वर्षीय महिला का दिल हुआ ठीक

Thane Health News: ठाणे के जुपिटर अस्पताल में डॉक्टरों ने बिना ओपन हार्ट सर्जरी 'माई क्लिप सिस्टम' तकनीक से 73 वर्षीय महिला के माइट्रल वाल्व की सफल मरम्मत कर नई जिंदगी दी।
73-year-old woman's heart treated with 'MitraClip' without open-heart surgery
जुपिटर अस्पताल ठाणे सोर्स- सोशल मीडिया
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Jupiter Hospital Thane MitraClip Surgery Dr Gautam Rege: 73 वर्षीय एक महिला के लिए सामान्य तरीके से लेटकर सोना भी मुश्किल हो गया था। करीब दो सप्ताह तक वह अस्पताल में बैठकर सोती रहीं, क्योंकि लेटते ही उन्हें सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगती थी। पहले उनकी कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी भी हो चुकी थी।

समय के साथ उनके माइट्रल वाल्व से रक्त का पीछे की ओर रिसाव बढ़ता गया। इसके कारण उन्हें बार-बार हार्ट फेल्योर की समस्या के चलते अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

दोबारा ओपन हार्ट सर्जरी थी जोखिमपूर्ण

मरीज की उम्र और पहले हो चुकी हार्ट सर्जरी के साथ-साथ किडनी की कम कार्यक्षमता और लगातार कम रक्तचाप की समस्या को देखते हुए दोबारा ओपन हार्ट सर्जरी को बेहद जोखिमपूर्ण माना गया।

ऐसे में ठाणे स्थित जुपिटर अस्पताल के कंसल्टेंट इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. गौतम रेगे और डॉ. प्रतीक साने के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम ने कम आक्रामक उपचार का विकल्प चुना।

माई क्लिप सिस्टम’ से माइट्रल वाल्व की मरम्मत

अस्पताल के अनुसार, टीम ने ट्रांसकैथेटर एज-टू-एज रिपेयर (TEER) प्रक्रिया के जरिए माइट्रल वाल्व की मरम्मत की। इसमें ‘माई क्लिप सिस्टम’ का इस्तेमाल किया गया। अस्पताल ने इसे ठाणे शहर में इस तरह की पहली प्रक्रिया बताया है, जिसमें बिना ओपन हार्ट सर्जरी माइट्रल वाल्व की मरम्मत की गई।

प्रक्रिया के दौरान जांघ की रक्त वाहिका के रास्ते कैथेटर को हृदय तक पहुंचाया गया। रियल-टाइम इमेजिंग की मदद से माइट्रल वाल्व की स्थिति देखी गई और उस पर विशेष क्लिप लगाई गई। इससे वाल्व से पीछे की ओर होने वाले रक्त के रिसाव को कम करने में मदद मिली।

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चार घंटे चली प्रक्रिया

ठाणे अस्पताल के मुताबिक, पूरी प्रक्रिया करीब चार घंटे तक चली और इसे जनरल एनेस्थीसिया में किया गया। उपचार के बाद मरीज को उसी दिन वेंटिलेटर से हटा दिया गया।

माइट्रल वाल्व हृदय के बाएं ऊपरी और निचले कक्ष के बीच रक्त प्रवाह को नियंत्रित करता है। वाल्व में रिसाव होने पर रक्त का कुछ हिस्सा पीछे की ओर जाने लगता है, जिससे हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इस मामले में बिना ओपन सर्जरी की गई प्रक्रिया के जरिए रिसाव को कम करने का प्रयास किया गया।

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