underworld link Thane (सोर्सः सोशल मीडिया)
Thane Drug Racket: मुंबई का पड़ोसी जिला ठाणे अपनी राजनीतिक, सामाजिक एवं व्यापारिक गतिविधियों को लेकर हमेशा चर्चित रहा है, लेकिन इस समय जिले के कुछ इलाकों में ड्रग माफिया तेजी से अपने पैर पसार रहे हैं। युवा पीढ़ी को बर्बाद करने के साथ-साथ उन्हें आपराधिक और आतंकी गतिविधियों में धकेलने वाले इन नेटवर्क पर लगाम कसने की पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद ड्रग तस्करी कम होने का नाम नहीं ले रही है।
पिछले कुछ महीनों में पुलिस ने ठाणे जिले में कई बड़े ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जिनमें सैकड़ों करोड़ रुपये मूल्य की हेरोइन और एमडी (MD) जैसे नशीले पदार्थ जब्त किए गए हैं। 7 फरवरी को ठाणे शहर पुलिस ने 4 किलोग्राम से अधिक हेरोइन जब्त कर तीन लोगों को गिरफ्तार किया।
एक अन्य कार्रवाई में 1 फरवरी को अपराध शाखा ने घोड़बंदर इलाके में एक ऑटो चालक को पकड़ा। आरोपी फरदीन गुलजार मुल्ला (50) के पास से 6.68 करोड़ रुपये से अधिक की हेरोइन जब्त की गई। पुलिस के अनुसार, दोनों मामलों में कुल मिलाकर चार किलोग्राम से अधिक हेरोइन बरामद हुई, जिसकी कीमत 13 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है।
इसके पहले अगस्त महीने में मुंब्रा इलाके से 27 करोड़ रुपये का ड्रग पकड़ा गया था। जनवरी 2026 की शुरुआत में ठाणे अपराध शाखा ने ओडिशा और तेलंगाना से गांजा तस्करी में शामिल एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर 2.04 करोड़ रुपये से अधिक का गांजा जब्त किया था। वहीं, नासिक-ठाणे हाईवे पर घेराबंदी कर दो कारों से 15 किलो से अधिक मेफेड्रोन भी बरामद किया गया, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 31.8 करोड़ रुपये आंकी गई। पुलिस के अनुसार, ठाणे अब मादक पदार्थों की तस्करी के लिए एक ट्रांजिट हब के रूप में उभर रहा है।
ठाणे पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, जिले में झोपड़पट्टी क्षेत्रों से लेकर पॉश इलाकों तक ड्रग का कारोबार फैल चुका है। कलवा, वागले इस्टेट और मुस्लिम बहुल मुंब्रा से लेकर भिवंडी, मीरा-भायंदर, वसई-विरार और नालासोपारा तक नशीले पदार्थों की तस्करी बढ़ी है।
ठाणे जिले में तेजी से हो रहे शहरीकरण के साथ अवैध निर्माण, झोपड़पट्टियां और अवैध गोदामों की संख्या भी बढ़ी है। भिवंडी, नालासोपारा, मुंब्रा-दिवा और कल्याण के ग्रामीण इलाकों से लेकर शीलफाटा, तलोजा और तुर्भे के आसपास के क्षेत्रों में ड्रग पेडलर्स की गतिविधियां तेज हुई हैं। मुंबई-नाशिक महामार्ग और मुंबई-अहमदाबाद हाईवे के पास बने गोदामों का उपयोग भी बाहर राज्यों में ड्रग तस्करी के लिए किया जा रहा है।
बताया जाता है कि पहले नाइजीरियन नागरिक ठाणे से लेकर मुंबई और नवी मुंबई तक ड्रग तस्करी में सक्रिय रहते थे, लेकिन अब ड्रग तस्करों के अंडरवर्ल्ड से संबंध सामने आने लगे हैं। गिरफ्तार आरोपियों में से एक का नाम 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट की जांच के दौरान भी सामने आया था। 27 करोड़ रुपये मूल्य की एमडी जब्त करने के मामले में एक महिला ड्रग पेडलर को भी गिरफ्तार किया गया। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के विश्लेषण से बड़े आपराधिक नेटवर्क से जुड़ाव के संकेत मिले हैं।
पुलिस ने दिवा इलाके में एक स्कूल के पास से वजाहत सईद (47) को गिरफ्तार किया, जिसके पास से हेरोइन बरामद हुई। पूछताछ के बाद उसके साथी मोहम्मद महादिक को भी पकड़ा गया। 67 वर्षीय महादिक को मुख्य आपूर्तिकर्ता बताया जा रहा है।
महादिक 1993 के धमाकों के बाद भारत से फरार हो गया था और करीब 22 साल तक फर्जी पहचान के साथ मस्कट और ओमान में रहा। बाद में वह चुपचाप देश लौट आया। पुलिस के अनुसार, 1990 के दशक में महादिक की अंडरवर्ल्ड में मजबूत पकड़ थी और उसके संबंध दाऊद इब्राहिम समेत कई गिरोहों से थे। उसके खिलाफ हत्या, अपहरण, जबरन वसूली और फर्जी पासपोर्ट जैसे कई मामले दर्ज हैं।
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पुलिस के अनुसार, ड्रग तस्करी करने वाले लोग एक संगठित गिरोह का हिस्सा हैं। पिछले महीने ठाणे में ड्रग तस्करी के मामले में पकड़ी गई एक बीएमडब्ल्यू कार के पीछे ठाणे मनपा का लोगो लगा हुआ मिला। पुलिस रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि आरोपी तनवीर अंसारी के खिलाफ भिवंडी में पहले से कई मामले दर्ज हैं।
वहीं, महेश नामक आरोपी पर एनडीपीएस एक्ट और मकोका सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमे चल रहे हैं। पुलिस को संदेह है कि दोनों एक बड़े और संगठित ड्रग नेटवर्क के सक्रिय सदस्य हैं, जो ठाणे और मुंबई में मेफेड्रोन की सप्लाई करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले ड्रग कारोबार से आने वाला पैसा आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल होने की आशंका भी जताई जा रही है। पुलिस इन पहलुओं की भी गहन जांच कर रही है।