ठाणे के मीरारोड में क्रेन हादसे में बेटे की मौत, बिल्डर पर कार्रवाई नहीं, पुलिस स्टेशन के बाहर पिता का धरना
Thane Crane Accident: मीरारोड क्रेन हादसे में युवक की मौत के मामले में 5 पर केस दर्ज हुआ, लेकिन बिल्डर का नाम एफआईआर में नहीं। न्याय की मांग को लेकर मृतक के पिता भूख हड़ताल पर बैठे।
- Written By: आलोक उमाकृष्ण
मीरारोड क्रेन दुर्घटना (फोटो नवभारत)
Thane Crane Accident Builder FIR: मीरारोड के विनयनगर स्थित जे.पी. इंफ्रा रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड की निर्माणाधीन परियोजना में हुए टावर क्रेन हादसे ने अब नया विवाद खड़ा कर दिया है।
21 वर्षीय मुज़म्मिल अब्दुल खोकर की मौत के मामले में काशीगांव पुलिस ने निर्माण कार्य से जुड़े 5 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, लेकिन परियोजना के मुख्य बिल्डर का नाम एफआईआर में शामिल नहीं किए जाने से मृतक परिवार और स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। मृतक के पिता ने बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर काशीगांव पुलिस स्टेशन के बाहर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है।
कब और कैसे?
बता दें कि 16 जुलाई की शाम करीब 7.30 बजे जे.के. आइरिस परिसर में निर्माणाधीन इमारत की 11वीं मंजिल पर काम के दौरान टावर क्रेन का भारी लोहे का हिस्सा अचानक नीचे गिर गया। हादसे में सोसायटी निवासी 21 वर्षीय मुज़म्मिल अब्दुल खोकर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि छह अन्य लोग घायल हो गए थे।
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दुर्घटना की चपेट में आकर परिसर में खड़ी 15 दोपहिया और 8 चारपहिया वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। पास की सोसायटी का जनरेटर और चारदीवारी भी बुरी तरह टूट गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि निर्माण स्थल के आसपास घनी आबादी होने के बावजूद आवश्यक सुरक्षा जाल और अन्य सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए थे।
आरोप है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लापरवाही के कारण यह गंभीर हादसा हुआ। घटना के बाद काशीगांव पुलिस स्टेशन के सहायक पुलिस निरीक्षक अतुल डाके की शिकायत पर जगदीश वाघेला, जयंत घडे, प्रशांत मशरूफ, सुरक्षा अभियंता राजेश झा, क्रेन मैकेनिकल सुपरवाइजर अनिल चौधरी तथा निर्माण कार्य से जुड़ी प्रीमियर इंजीनियर्स और अन्य संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। मामले की जांच सहायक पुलिस निरीक्षक आशुतोष चव्हाण वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में कर रहे हैं।
लोगों ने लगाए आरोप
मृतक के परिजनों और जे.के. आइरिस सोसायटी के निवासियों का आरोप है कि परियोजना के मुख्य बिल्डर को जानबूझकर एफआईआर से बाहर रखा गया है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य का अंतिम दायित्व मुख्य बिल्डर का होता है, ऐसे में उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव के कारण मुख्य बिल्डर को बचाने का प्रयास किया गया है। मृतक मुज़म्मिल के पिता अब्दुल अजीज खोकर ने सोमवार से काशीगांव पुलिस स्टेशन के बाहर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है।
उनकी मांग है कि परियोजना के निदेशक और मुख्य बिल्डर को भी आरोपी बनाया जाए तथा बेटे की मौत के लिए जिम्मेदार सभी लोगों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जाए। उनके साथ परिवार के सदस्य, रिश्तेदार और सोसायटी के निवासी भी धरने में शामिल हैं।
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बिल्डर है दोषी!
सोसायटी के लोगों का आरोप है कि हादसे के कई दिन बाद भी बिल्डर ने क्षतिग्रस्त वाहनों के मुआवजे को लेकर कोई पहल नहीं की है। वहीं, मृतक परिवार का कहना है कि अब तक किसी जनप्रतिनिधि ने उनके घर पहुंचकर सांत्वना तक नहीं दी, जिससे स्थानीय लोगों में भी नाराजगी बढ़ती जा रही है।
निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि मुख्य बिल्डर के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई नहीं की गई तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे और आंदोलन को और तेज करेंगे। फिलहाल यह मामला केवल एक निर्माण हादसे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि मुख्य जिम्मेदारों की जवाबदेही और निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
