ठाणे कोर्ट का फैसला: कोविड आदेशों का उल्लंघन और लोक सेवक से दुर्व्यवहार मामले में आरोपी बरी
Thane news: कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान आदेशों का उल्लंघन और लोक सेवक के काम में बाधा डालने के आरोप में फंसे अनवर मीर सैयद को ठाणे कोर्ट ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
- Written By: सोनाली चावरे
ठाणे कोर्ट में आरोपी बरी (pic credit; social media)
Thane Court News: ठाणे की एक अदालत ने कोविड-19 महामारी के दौरान दर्ज किए गए एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी अनवर मीर सैयद को बरी कर दिया है। उन पर लॉकडाउन आदेशों का उल्लंघन करने और लोक सेवक के काम में बाधा डालने का आरोप था।
यह मामला साल 2020 का है, जब जिले में महामारी नियंत्रण के तहत निषेधाज्ञा लागू थी। मुंब्रा निवासी अनवर मीर सैयद के खिलाफ ठाणे मनपा में कार्यरत लिपिक जितेंद्र साबले ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि 9 और 10 अप्रैल 2020 को गश्त के दौरान सैयद ने साबले और उनके साथियों के काम में बाधा डाली।
इस शिकायत के आधार पर सैयद पर भारतीय दंड संहिता, महामारी रोग अधिनियम और आपदा प्रबंधन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
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मामला अदालत में पहुंचा तो अभियोजन पक्ष ने केवल शिकायतकर्ता जितेंद्र साबले और जांच अधिकारी रुपचंद शिंदे की गवाही के आधार पर आरोप साबित करने की कोशिश की। हालांकि बचाव पक्ष ने इस गवाही को चुनौती दी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वी जी मोहिते ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में नाकाम रहा है। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता की गवाही अकेले किसी को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है।
अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष शिकायत की पुष्टि के लिए कोई स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शी गवाह पेश नहीं कर सका। न ही ऐसे दस्तावेजी साक्ष्य लाए गए जो यह साबित करें कि गश्त उस समय और जगह पर वास्तव में हुई थी।
न्यायाधीश ने अपने आदेश में लिखा, “शिकायतकर्ता के साक्ष्य की पुष्टि के लिए प्रत्यक्ष गवाह या दस्तावेजी साक्ष्य की जरूरत होती है। अभियोजन पक्ष ने ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया।”
सबूतों के अभाव में अदालत ने अनवर मीर सैयद को सभी आरोपों से बरी कर दिया। इस फैसले ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि केवल आरोपों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, बल्कि ठोस साक्ष्यों की जरूरत होती है।
