मॉडल से दुष्कर्म के आरोपी की जमानत याचिका खारिज, ठाणे कोर्ट ने कहा- गंभीर अपराधों में समझौते की गुंजाइश नहीं
Thane Physical Abuse Case: महाराष्ट्र की ठाणे सत्र अदालत ने मॉडल से दुष्कर्म के आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए साफ किया कि ऐसे गंभीर मामलों में समझौते या वैवाहिक जीवन बचाने की दलीलें अमान्य हैं।
- Written By: आकाश मसने
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Model Physical Abuse Case Thane Court Bail Reject: महिला सुरक्षा और गंभीर अपराधों पर कड़ा रुख अपनाते हुए ठाणे की एक सत्र अदालत ने एक मॉडल के साथ हुए कथित दुष्कर्म मामले में आरोपी की जमानत अर्जी नामंजूर कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बलात्कार जैसा जघन्य कृत्य केवल दो पक्षों का निजी मामला नहीं, बल्कि पूरे समाज के विरुद्ध अपराध है।
दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराधों में समझौते की गुंजाइश नहीं हो सकती, यह कहते हुए महाराष्ट्र के ठाणे की सत्र अदालत ने एक मॉडल से कथित दुष्कर्म के आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने पीड़िता की ओर से शादी बचाने के लिए पेश किए गए समझौता हलफनामे को भी मानने से इनकार कर दिया और कहा कि ऐसा अपराध केवल दो व्यक्तियों का मामला नहीं, बल्कि पूरे समाज के खिलाफ है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की जांच अभी जारी है और आरोपपत्र दाखिल होना बाकी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पीवी घुले ने यह आदेश पारित किया।
क्या है मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, सूरत निवासी अक्षय कुमार कांतिलाल जैन को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। पंजाब की मूल निवासी मॉडल ने आरोप लगाया है कि जैन उसे अभिनय के ‘ऑडिशन’ का झांसा देकर गोवा से मीरा रोड स्थित एक होटल में ले गया, जहां उसने उसकी चाय में नशीला पदार्थ मिला दिया और उसके साथ दुष्कर्म किया।
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बचाव पक्ष ने सुनवाई के दौरान जमानत याचिका मंजूर करने का अनुरोध करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता ने एक नोटरीकृत शपथपत्र-सह-घोषणापत्र प्रस्तुत किया है, जिसमें उसने अपनी शादी तय होने का हवाला देते हुए आरोप वापस लेने की इच्छा जताई है।
अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह गंभीर और समझौता न किया जा सकने वाला अपराध है। अतिरिक्त लोक अभियोजक मनीषा पावसे ने दलील दी कि आरोपी को जमानत दिए जाने का कोई आधार नहीं है।
शादी प्रभावित होने की आशंका को किया खारिज
ठाणे कोर्ट के न्यायाधीश घुले ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि शादी प्रभावित होने की आशंका का जो कारण बताया गया है, वह अप्रासंगिक है। यह अपराध पूरे समाज के खिलाफ है, इसलिए इसमें कोई समझौता नहीं हो सकता। प्राथमिकी वापस लेने का प्रयास स्वतंत्र और स्वेच्छा से किया गया प्रतीत नहीं होता। शिकायतकर्ता प्राथमिकी वापस लेने का अनुरोध नहीं कर सकती।
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अदालत ने पीड़िता के शपथपत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि उससे यह संकेत मिलता है कि दुष्कर्म का अपराध हुआ है। न्यायाधीश ने कहा कि शिकायतकर्ता को आशंका है कि यदि उसके होने वाले पति को इस घटना की जानकारी मिली तो उसका वैवाहिक जीवन प्रभावित हो सकता है। मीरा रोड स्थित होटल में उसके ठहरने के दौरान यौन संबंध स्थापित करने के लिए उसकी सहमति नहीं थी। यह ऐसा अपराध नहीं है, जिसमें समझौता किया जा सके। अदालत ने यह भी कहा कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और आरोपपत्र दाखिल किया जाना बाकी है।
