

Mira Road Minor Assault Case Family Forced To Migrate: देश की आर्थिक राजधानी के करीब बसे मीरा रोड इलाके से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने न केवल कानून व्यवस्था बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी झकझोर कर रख दिया है। एक नाबालिग लड़की, जिसके साथ पहले प्यार का झांसा देकर दरिंदगी की गई, अब वह और उसका परिवार अपनी जान बचाने के लिए सड़कों पर सूटकेस लेकर दर-दर भटकने को मजबूर है।
घटना की शुरुआत मोहब्बत की आड़ में हुई, जहां आरोपी सौद खान ने नाबालिग को एक रिसॉर्ट में ले जाकर उसके साथ बलात्कार किया। इतना ही नहीं, आरोपी ने पीड़िता की कुछ अश्लील तस्वीरें भी ले लीं, जिनके आधार पर वह उसे ब्लैकमेल करने लगा। पीड़िता ने आरोप लगाया कि सौद खान उस पर निकाह करने और इस्लाम धर्म कबूल करने का दबाव बना रहा था। उसे नमाज पढ़ने और बुर्का पहनने के लिए मजबूर किया जाता था, और विरोध करने पर उसके साथ बुरी तरह मारपीट की जाती थी।
आरोपी की प्रताड़ना और धमकियों से तंग आकर मासूम ने सुसाइड करने की कोशिश की और 9वीं मंजिल से छलांग लगा दी। इस हादसे में उसके हाथ, पैर और जबड़े में गंभीर फ्रैक्चर हुए और वह कई महीनों तक कोमा में रही। लेकिन न्याय की विडंबना देखिए, जब वह मौत के मुंह से बाहर आई, तो धमकियों का सिलसिला फिर शुरू हो गया। आरोपी के बढ़ते हौसलों और लगातार मिल रही धमकियों के कारण अब यह परिवार अपना घर छोड़कर सुरक्षित ठिकाने की तलाश में पलायन करने को मजबूर है।
मीरा रोड पुलिस ने आरोपी सौद खान के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की धारा 4, 8, 12, आईटी एक्ट की धारा 67 और बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। मिरारोड डीसीपी राहुल चव्हाण ने बताया कि आरोपी को इसी साल तड़ीपार किया गया था, लेकिन वह अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। हालांकि पुलिस का कहना है कि वे परिवार को सुरक्षा प्रदान करेंगे और उन्हें डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन आरोपी की गिरफ्तारी न होने के कारण परिवार का भरोसा टूट चुका है।
आज जब वह परिवार अपने हाथों में सूटकेस थामे अनजान रास्तों पर खड़ा है, तो यह केवल एक परिवार का पलायन नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक सुरक्षा और न्याय व्यवस्था की हार है। वह बच्ची, जिसने अभी ठीक से दुनिया भी नहीं देखी थी, आज अपनी ही पहचान और अस्तित्व को बचाने के लिए भाग रही है।
जिस उम्र में उसे स्कूल बैग लेकर अपनी सुनहरी भविष्य की ओर जाना चाहिए था, उस उम्र में वह अपनी जान और इज्जत की पोटली समेटे हुए दर-ब-दर की ठोकरें खा रही है। क्या हम एक ऐसा समाज बन गए हैं जहां अपराधी खुलेआम घूमते हैं और पीड़ित को अपना ही घर छोड़कर शरणार्थी बनना पड़ता है? उस सूटकेस में केवल कपड़े नहीं, बल्कि एक मासूम के टूटे हुए सपने, उसकी सिसकियां और समाज से पूछे गए अनगिनत सवाल बंद हैं, जिनका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है।