ठाणे: नाबालिग से रेप के मामले में युवक बरी, कोर्ट ने कहा- उम्र को लेकर साक्ष्य अधूरे, संबंध सहमति से बने
Thane News: ठाणे की विशेष अदालत ने 28 वर्षीय युवक को पॉक्सो (POCSO) और दुष्कर्म के आरोपों से बरी किया। कोर्ट ने जन्म प्रमाण पत्र में छेड़छाड़ और आपसी सहमति को बरी करने का आधार माना।
- Written By: आकाश मसने
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Thane Court Verdict In POCSO Case: महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक विशेष अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में 28 वर्षीय युवक को नाबालिग के साथ दुष्कर्म और पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत लगे आरोपों से मुक्त कर दिया है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी। साथ ही, उपलब्ध तथ्यों और बयानों से यह संकेत मिलता है कि दोनों के बीच संबंध पूरी तरह से सहमति पर आधारित थे।
क्या था मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी शमशेर रईस खान और पीड़िता एक ही मोहल्ले के निवासी थे और उनके बीच प्रेम संबंध था। आरोप लगाया गया था कि नवंबर 2019 में खान ने शादी का झांसा देकर लड़की को एक खाली घर में ले जाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। यह मामला जनवरी में तब प्रकाश में आया जब चिकित्सकीय परीक्षण के दौरान किशोरी के गर्भवती होने की पुष्टि हुई। इसके बाद आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(2)(एन) और पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
अदालत की सख्त टिप्पणी और साक्ष्यों का अभाव
विशेष न्यायाधीश एस. पी. अग्रवाल ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि पीड़िता की उम्र को लेकर पेश किए गए सबूतों में भारी विसंगतियां हैं। अदालत ने गौर किया कि पीड़िता की मां द्वारा प्रस्तुत जन्म प्रमाणपत्र के साथ छेड़छाड़ की गई थी और उसमें जन्म का वर्ष स्पष्ट नहीं था।
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चिकित्सीय साक्ष्यों पर चर्चा करते हुए कोर्ट ने कहा कि मेडिकल टीम की जांच में लड़की की उम्र 16 से 17 वर्ष के बीच बताई गई थी। न्यायाधीश ने आदेश में कहा कि जांच रिपोर्ट और पीड़िता व उसकी मां के बयानों में इस बात को लेकर भी विरोधाभास है कि घटना के वक्त वह किस कक्षा में पढ़ रही थी। ये तमाम कड़ियां इस संदेह को पुख्ता करती हैं कि घटना के समय पीड़िता बालिग रही होगी।
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सहमति से बने थे संबंध
जिरह के दौरान पीड़िता ने स्वयं स्वीकार किया कि वह आरोपी को पसंद करती थी और अपनी मर्जी से उससे मिलने गई थी। कोर्ट ने इसी स्वीकारोक्ति को आधार बनाते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला आपसी प्रेम और सहमति से बने शारीरिक संबंधों का प्रतीत होता है। अदालत ने आरोपी को सभी आरोपों से ससम्मान बरी कर दिया।
