ठाणे: पुलिस कांस्टेबल पर जानलेवा हमले के 8 आरोपी बरी, गवाहों के पलटने से कमजोर पड़ा केस, जानें पूरा मामला
Thane News: महाराष्ट्र के ठाणे में 2016 में पुलिस कांस्टेबल भास्कर सोनावणे पर हुए जानलेवा हमले के मामले में कोर्ट ने सबूतों के अभाव और मुख्य गवाहों के मुकर जाने पर 8 आरोपियों को बरी कर दिया।
- Written By: आकाश मसने
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Thane Police Constable Attack News: महाराष्ट्र की एक स्थानीय अदालत ने कर्तव्य पर तैनात एक पुलिस कांस्टेबल की हत्या के प्रयास के आरोपी आठ व्यक्तियों को बरी कर दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वी. एल. भोसले ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष (Prosecution) आरोपियों के खिलाफ लगे आरोपों को संदेह के परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। इस मामले में सबसे बड़ी बाधा पीड़ित कांस्टेबल द्वारा अपने हमलावरों को न पहचान पाना और मुख्य गवाहों का अपने बयानों से पलट जाना रही।
क्या था पूरा मामला?
यह घटना 21 अप्रैल, 2016 की रात की है। ठाणे के उपवन इलाके में स्थित एक बार के बाहर कांस्टेबल भास्कर सोनावणे अपने एक मुखबिर से मिलने के लिए खड़े थे। उसी दौरान होटल प्रबंधन और कमलेश नाम के एक ग्राहक के बीच किसी बात को लेकर तीखा विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि कमलेश का भाई अरुण करीब 10 से 15 लोगों की भीड़ लेकर मौके पर पहुंच गया।
आरोप था कि इस हिंसक भीड़ ने कांस्टेबल सोनावणे पर लाठियों और बीयर की बोतलों से जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में कांस्टेबल को गंभीर चोटें आई थीं; उनकी खोपड़ी में फ्रैक्चर हो गया था और मस्तिष्क में भी गहरी चोट लगी थी। ठाणे पुलिस ने इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार कर उन पर हत्या के प्रयास (IPC की धारा 307) के तहत मामला दर्ज किया था।
सम्बंधित ख़बरें
अंधेरी में घरेलू विवाद बना मौत की वजह, पति की पिटाई के बाद महिला की मौत
Gondia जिला परिषद में मचा हड़कंप; मनरेगा मजदूरी के लिए ग्राम पंचायत सदस्य ने कीया ‘मैं भी कॉकरोच’ आंदोलन
मीरा-भाईंदर में फर्जी ऑटो परमिट घोटाले पर सियासी घमासान, 28 संदिग्धों पर कार्रवाई शुरू
नागपुर में नौतपा शुरू, 2 जून तक बरसेगी सूरज की आग; डॉक्टरों ने जारी की धूप से सतर्क रहने की सलाह
अदालत के फैसले का आधार
सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने पाया कि घटना रात के अंधेरे में हुई थी, जिसके कारण पीड़ित कांस्टेबल खुद हमलावरों की पहचान करने में असमर्थ रहे। हमले के तुरंत बाद सोनावणे बेहोश हो गए थे, जिस वजह से वह यह नहीं बता पाए कि वास्तव में उन पर प्रहार किसने किया था।
यह भी पढ़ें:- CIDCO Budget: नवी मुंबई बनेगी ग्लोबल हब, सिडको ने पेश किया 16250 करोड़ का बजट, मेट्रो-एयरपोर्ट के लिए हुए ऐलान
मामले को कमजोर करने में सबसे अहम भूमिका गवाहों की रही। होटल के साझेदार राजेश शेट्टी और प्रबंधक नवीन गौड़ा, जो इस मामले के मूल शिकायतकर्ता और चश्मदीद थे, दोनों ही अदालत में मुकर गए। अदालत ने कहा कि जब मुख्य गवाह ही अपने बयानों का समर्थन नहीं कर रहे हैं और पीड़ित खुद आरोपियों को नहीं पहचान पा रहा है, तो ऐसी स्थिति में आरोपियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
