Maharashtra News: ठाणे चुनाव से पहले भाजपा का शक्ति प्रदर्शन, युति में दबाव की राजनीति
Thane Municipal Election में भाजपा-शिवसेना युति तय है, लेकिन सीट शेयरिंग को लेकर भाजपा आक्रामक रणनीति अपना रही है। 50-50 फार्मूले और अकेले लड़ने के संकेतों से सियासत गरमाई है।
- Written By: अपूर्वा नायक
ठाणे महानगरपालिका
Thane News In Hindi: केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने स्पष्ट किया है कि ठाणे मनपा सहित जिले की अन्य महानगरपालिकाओं में भाजपा महायुति की घटक शिवसेना के साथ मिल कर चुनाव लड़ेगी।
लेकिन युति के तहत अधिक सीटों को अपनी तरफ खींचने के लिए भाजपा ने प्रेशर टैक्टिस शुरू की है। भाजपा की मंडल इकाइयों की तरफ से जहां पत्रकार परिषद आयोजित कर अकेले चुनाव लड़ने की बात कही जा रही है, वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता सीट शेयरिंग में 50-50 फार्मूले की बात कर रहे हैं।
ठाणे मनपा भाजपा चुनाव प्रभारी विधायक संजय केलर ने शिवसेना-भाजपा की पहली समन्वय बैठक में स्पष्ट रूप से कहा कि ठाणे में युति हो या नहीं, भाजपा की सफलता मिलेगी। ठाणे शहर राज्य के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का होम टाउन है।
सम्बंधित ख़बरें
रेलवे की बड़ी लापरवाही, पार्किंग ठेकेदारों के भरोसे यात्रियों की जान? 7 महीने बाद भी ठाणे-घाटकोपर में EMR बंद
अगर बॉडी बनाने के लिए फाइबर को छोड़ प्रोटीन पर दें रहें ध्यान, तो हो जाइए सावधान! हो सकता है कैंसर का खतरा
Pre Wedding Photo Shoot: आपकी लव स्टोरी में चार चांद लगाने के लिए 5 शानदार प्री वेडिंग फोटो शूट आइडिया
बदलापुर: मारपीट तक पहुंचा महायुति का मतभेद, शिंदे के पार्षदों ने की बीजेपी पदाधिकारी के बेटे की पिटाई
ठाणे में DCM एकनाथ शिंदे का रहा है वर्चस्व
ठाणे को शिवसेना का गढ़ कहा जाता है। शिवसेना को पहली बार सत्ता सुख ठाणे से ही मिला था। ठाणे जिला शिवसेना प्रमुख रहे आनंद दिघे के बाद से ठाणे में उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का वर्चस्व रहा है। पिछले मनपा चुनाव में शिवसेना के 67 नगरसेवक निर्वाचित हुये थे।
अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी में थी भाजपा
जबकि भाजपा को 23 सीटों पर सफलता मिली थी। हालांकि पिछले 8 सालों में राजनीति में बहुत बड़ा बदलाव हुआ है। शिवसेना दो खेमों में विभाजित हो गयी है लेकिन एकनाथ शिंदे की ताकत बढ़ी है। दूसरे दलों के पूर्व नगरसेवक शिवसेना में शामिल हुये हैं।
जिससे शिवसेना के पूर्व नगरसेवकों की संख्या बढ़ कर 79 हो गयी है, जबकि भाजपा की यह संख्या 24 है। गौरतलब हो कि विधानसभा चुनाव खत्म होने के साथ ही भाजपा ने ठाणे मनपा सहित जिले की अन्य महानगरपालिकाओं का चुनाव अकेले के दम पर लड़ने की तैयारी भी शुरू कर दी थी, ठाणे में संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी वन मंत्री गणेश नाईक को दी गई थी।
किंतु मनपा चुनाव से पूर्व भाजपा द्वारा कराए गए आंतरिक सर्वे में कहा गया है कि यदि भाजपा अकेले दम पर चुनाव लड़ती है तो उसे 30 से 35 के आसपास सीटें मिल सकती हैं जो बहुमत के आंकड़े से काफी दूर हैं। सर्वे में यह भी कहा गया है कि यदि ठाणे मनपा चुनाव भाजपा शिवसेना मिलकर चुनाव लड़ती है तो भी 30 सीटें मिलने का अनुमान है।
517 कार्यकर्ता चुनाव लड़ने के लिए तैयार
भाजपा ने सभी 131 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी के तहत चुनाव लड़ने के इच्छुको से आवेदन मगाए थे। ठाणे महानगर पालिका के सभी वार्डों से कुल 517 कार्यकर्ताओं ने चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है, केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर शिवसेना के साथ युति करना अपरिहार्य हो गया है।
बावजूद इसके भाजपा सीट शेयरिंग के तहत अधिक से अधिक सीटे खींचना चाहती है। जिसके तहत बुधवार को कोपरी मंडल के भाजपा अध्यक्ष कृष्णा भुजबल ने पत्रकार परिषद आयोजित कर युति का विरोध किया तो गुरुवार को कलवा पूर्व एवं पश्चिम के भाजपा मण्डल अध्यक्षों ने पत्रकार परिषद का आयोजन कर क्षेत्र की 50 प्रतिशत सीटों पर दावा किया।
ये भी पढ़ें :- BMC Election 2025: भाजपा की सख्त नीति, घाटकोपर पूर्व में 40% टिकट कटने के संकेत
कलवा पश्चिम मंडल के अध्यक्ष तेजस चंद्र मोरे एवं कलवा पूर्व मंडल के अध्यक्ष कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि कलवा प्रभाग समिति क्षेत्र में कुल 16 सीटें हैं जिनमें से युति के तहत 8 सीटें भाजपा को मिलनी ही चाहिए, यह इलाका उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पुत्र सांसद डॉ। श्रीकांत शिंदे केन संसदीय क्षेत्र अंतर्गत आता है। जबकि कोपरी से खुद एकनाथ शिंदे विधायक है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के विधानसभा क्षेत्र में भी भाजपा अधिक सीटों का दावा कर रही है।
