Parents Protest Sschool Fees Thane (सोर्सः सोशल मीडिया)
Parents Protest School Fees Thane: स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के पहले ही अभिभावकों पर फ़ीस बढ़ोतरी की गाज गिर रही है। बताया गया कि ठाणे, मुंबई के कई अंग्रेजी विद्यालयों द्वारा नए शैक्षणिक सत्र से फीस बढ़ाने का निर्णय लिए जाने से अभिभावकों में चिंता के साथ नाराजगी का माहौल है।
आम लोगों पर महंगाई की मार के बीच अब उनके बच्चों की अंग्रेजी शिक्षा और महंगी होती जा रही है। ठाणे के एक CBSE स्कूल के खिलाफ पेरेंट्स का गुस्सा उस समय फूट पड़ा जब प्रबंधन ने प्रायमरी क्लास की फीस 20 से लेकर 40 प्रतिशत तक बढ़ा दी । ठाणे के राबोडी इलाके में सरस्वती स्कूल की मनमानी फीस बढ़ोतरी से पैरेंट्स नाराज हो गए।
बताया गया कि डिजिटलाइजेशन के नाम पर एक्स्ट्रा फीस, स्कूल का सामान खरीदने में मोनोपॉली, उसी स्कूल की अगली कक्षा में प्रवेश के लिए हजारों रुपए एडमिशन फीस से नाराज पेरेंट्स स्थानीय MLA संजय केलकर के पास अपनी शिकायत लेकर पहुंच गए। अभिभावकों की लिखित और मौखिक शिकायतों को समझने के बाद विधायक केलकर ने कहा कि इस समस्या पर प्रबंधन से बात कर हल निकाला जाएगा। विधायक ने कहा कि यदि कोई भी विद्यालय प्रबंधन मनमानी फी बढ़ाता है तो उनके खिलाफ शासन-प्रशासन को शिकायत करने के साथ आंदोलन का रास्ता भी अख्तियार किया जाएगा।
पता चला है कि ठाणे व आसपास के कई सीबीएसई पाठ्यक्रम वाले अंग्रेजी विद्यालयों ने इस साल बच्चों की फीस में मनमाना बढ़ोतरी की है। इस समय ज्यादातर स्कूल नए सत्र के लिए एडमिशन भी ले रहे हैं। ठाणे के ज्यादातर अंग्रेजी स्कूलों में कक्षा 1 की फीस 75 हजार से लेकर 1.50 लाख रुपए सालाना हो गई है। परेशान अभिभावकों का कहना है कि वार्षिक फी के अलावा अन्य करिकुलम के लिए अलग से हजारों रुपए वसूले जाते हैं।
ठाणे के राबोड़ी स्थित सरस्वती विद्यालय के पेरेंट्स की तरफ से दिए गए बयान के मुताबिक, स्कूल मैनेजमेंट ने बिना कोई पहले से नोटिस दिए आने वाले एकेडमिक ईयर 2026-2027 के लिए फीस में 20 परसेंट से 40 परसेंट तक की बढ़ोतरी कर दी है। इस बारे में जब स्कूल मैनेजमेंट से बात की गई तो बताया गया कि स्टेट बोर्ड से CBSE बोर्ड में बदलने की वजह से फीस बढ़ाई गई है। क्लास 1 की फीस सीधे 48 हजार रुपये से बढ़ाकर 65 हजार रुपये कर दी गई है। यह फीस बढ़ोतरी मिडिल क्लास पेरेंट्स के साथ एक तरह का अन्याय ही है।
पेरेंट्स का कहना कि बोर्ड बदलने का फैसला करते समय पेरेंट्स को भरोसे में नहीं लिया गया और न ही उनकी फाइनेंशियल कैपेसिटी पर ध्यान दिया गया। बोर्ड बदलने की वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि स्कूल मैनेजमेंट स्टूडेंट्स को हर साल स्कूल से ही हजारों रुपये की किताबें खरीदने के लिए मजबूर कर रहा है। यूनिफॉर्म सिर्फ दो खास वेंडर्स को भेजी जाती है। अभिभावकों के किसी भी निवेदन पर ध्यान नहीं दिया जाता।
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डिजिटलाइजेशन के नाम पर एक्स्ट्रा फीस वसूली जा रही है। जब पेरेंट्स ने इस फीस बढ़ोतरी के खिलाफ लिखित शिकायत की कोशिश की, तो प्रिंसिपल ने उसे लेने से मना कर दिया। शिकायत करने वाले पेरेंट्स और स्टूडेंट्स के नाम मांगे जाते। इससे अभिभावकों में भी डर पैदा हो जाता है कि कहीं स्कूल में बच्चों को परेशान तो नहीं किया जाएगा।
गौरतलब है कि मुंबई, ठाणे, एमएमआर सहित राज्य के अन्य शहरों में अब स्टेट बोर्ड की बजाय सीबीएससी और आईसीएससी बोर्ड के अंग्रेजी स्कूलों की संख्या बढ़ी हुई है। इस वजह से स्टेट बोर्ड का नियंत्रण उन स्कूलों पर नहीं हो पाता। इसका फायदा भी अंग्रेजी स्कूल उठा रहे हैं।
इस बारे में MLA संजय केलकर ने भी कहा कि ठाणे में CBSE बोर्ड के स्कूलों में हजारों पेरेंट्स इन दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। उन्हें सरस्वती स्कूल से पेरेंट्स की दिक्कतों के बारे में पता चला है। वे इस बारे में एजुकेशन ऑफिसर और स्कूल के ट्रस्टियों से भी बात करेंगे। पेरेंट्स के हित में फैसला लिया जाएगा। अगर इससे बात नहीं बनी, तो वे सीधे एजुकेशन मिनिस्टर से मीटिंग करके पेरेंट्स को राहत दिलाने की कोशिश करेंगे।