

Thane 193 Acre Land Dispute News: सुप्रीम कोर्ट ने संजय गांधी नेशनल पार्क के पास चीतलसर-मानपाड़ा में 193 एकड़ जमीन के मालिकाना हक से जुड़े बहुचर्चित मामले का निपटारा कर दिया है।
ठाणे मनपा और मेसर्स डी। दह्याभाई एंड कंपनी के बीच हुए समझौते को ध्यान में रखते हुए, कोर्ट ने स्पेशल परमिशन याचिका का निपटारा कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यह जमीन दह्याभाई कंपनी की है, इस पर पार्क रिजर्वेशन के अधिकार भी बरकरार रखा है।
फैसले के बाद, चर्चा है कि मनपा ने इस जमीन के बदले लगभग 2800 करोड़ रुपये के डेवलपमेंट ट्रांसफर राइट्स (टीडीआर) देने की प्रक्रिया तेजी से शुरू कर दी है। हालांकि इस समझौते के बाद मनसे ने इस मामले में बड़े पैमाने पर घोटाला होने का आरोप लगाया है। वहीं भाजपा के नगरसेवक नारायण पवार ने इस मामले में मनपा से स्पष्टीकरण देने की मांग की है।
पता हो कि ठाणे मनपा ने इस जमीन में से करीब 100 एकड़ जमीन पार्क के लिए रिजर्व कर दी थी, क्योंकि जमीन का इस्तेमाल डेवलपमेंट के लिए नहीं किया जा सकता था, इसलिए कंपनी ने बदले में डेवलपमेंट ट्रांसफर राइट्स मांगा।
इस टीडीआर की संभावित कीमत करीब 2,800 करोड़ रुपये है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने यह मानते हुए कि जमीन प्राइवेट मालिकाना हक में है, जमीन के मालिक मेसर्स डी। दह्याभाई एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के अधिकारों को बरकरार रखा था।
ठाणे मनपा को 21 दिनों के अंदर डेवलपमेंट राइट्स सर्टिफिकेट के रूप में कानूनी मुआवजा देने का भी आदेश दिया, ठाणे मनपा ने मुंबई हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, सुनवाई के दौरान मनया ने दलील दी कि कंपनी ने यूडीसीपीआर में जरूरी शर्तें पूरी नहीं की है।
मनपा ने कोर्ट को बताया कि जमीन का अधूरा ट्रांसफर, जमीन के चारों ओर फेंसिंग और दूसरे प्रशासनिक प्रक्रिया की वजह से टीडीआर जारी नहीं किया गया। कोर्ट ने ठाणे मनपा और मेसर्स डी। दह्याभाई कंपनी के बीच हुए सेटलमेंट पर ध्यान दिया और स्पेशल परमिशन पिटीशन का निपटारा कर दिया।
मनसे के स्वप्निल महिंद्राकर ने सबूतों के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बहुत गंभीर आरोप लगाया है कि यह मामला राज्य सरकार और मनपा की मिलीभगत से हुआ है। यह मामला कुल 193 एकड़ जमीन से जुड़ा है और यह जमीन 1980 से सीधे वन विभाग और संजय गांधी नेशनल पार्क के अधिकार क्षेत्र में आती है।
2016 में इस पूरी जमीन 'इको-सेंसिटिव जोन' आने की घोषणा की गई थी, में आती है, जब 'यूनिफाइड डीसीपीआर नियमों के अनुसार ऐसी जमीनों को टीडीआर नहीं दिया जा सकता, तो सवाल यह है कि मनपा ने इस कंपनी को टीडीआर कैसे दिया।