रमेश म्हात्रे से शिंदे गुट ने किया किनारा, गिरफ्तार होते ही बिगड़ी तबियत, भारी पड़ा महिला डाक्टर पर हाथ उठाना
Ramesh Mhatre Arrested Doctors Assault Case: डोंबिवली में महिला डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ से मारपीट के आरोपी शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे गिरफ्तार, गिरफ्तारी के बाद बिगड़ी तबीयत।
- Written By: अनिल सिंह
शिंदे गुट ने रमेश म्हात्रे से किया किनारा (फोटो क्रेडिट-X)
Eknath Shinde Faction On Ramesh Mhatre: महाराष्ट्र के कल्याण-डोंबिवली क्षेत्र में ऑन-ड्यूटी डॉक्टरों और नर्सों के साथ खुलेआम बदसलूकी और मारपीट करने के मामले में आखिरकार कानून का डंडा चल गया है। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के रसूखदार स्थानीय पार्षद रमेश सुकऱ्या म्हात्रे और उनके तीन अन्य सहयोगियों को विष्णुनगर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि, गिरफ्तारी की आधिकारिक प्रक्रिया पूरी होते ही म्हात्रे की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच ठाणे के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद जहां विपक्षी दलों ने सरकार के ‘गुंडाराज’ पर तीखे सवाल उठाए हैं, वहीं खुद शिंदे गुट ने अपने ही पार्षद के इस हिंसक कृत्य से पूरी तरह किनारा कर लिया है। कल्याण लोकसभा क्षेत्र के सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए साफ किया है कि पार्टी ऐसे किसी भी अमानवीय कृत्य का समर्थन नहीं करती है।
एनआईसीयू बेड विवाद से शुरू हुआ मामला
यह पूरी शर्मनाक घटना सोमवार (6 जुलाई 2026) की शाम कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) द्वारा संचालित शास्त्रीनगर सरकारी अस्पताल में घटित हुई थी। अस्पताल के गायनेकोलॉजी वॉर्ड में एक नौ महीने की गर्भवती महिला को प्रसव के लिए लाया गया था। ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों ने मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए परिजनों को समझाया कि डिलीवरी के तुरंत बाद नवजात शिशु को गहन चिकित्सा कक्ष (NICU) बेड की जरूरत पड़ सकती है, जो फिलहाल यहां उपलब्ध नहीं है। डॉक्टरों ने बच्चे की सुरक्षा के लिए उन्हें किसी अन्य सर्वसुविधायुक्त अस्पताल में जाने की सलाह दी।
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यह सुनते ही परिजनों ने स्थानीय पार्षद रमेश म्हात्रे को बुला लिया। म्हात्रे अपने निजी बाउंसरों और समर्थकों के साथ धड़धड़ाते हुए अस्पताल के भीतर घुस गए और बिना कुछ सोचे-समझे डॉ. वैभव सालुंखे और एक महिला डॉक्टर के साथ गाली-गलौज और हाथापाई शुरू कर दी। सीसीटीवी फुटेज में साफ देखा गया कि उन्होंने ऑन-ड्यूटी महिला डॉक्टर का मोबाइल फोन भी छीनकर जमीन पर फेंक दिया।
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श्रीकांत शिंदे ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
घटना का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल होते ही राज्यभर के चिकित्सा जगत और आम जनता में भारी आक्रोश फैल गया। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की कल्याण-डोंबिवली शाखा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए चेतावनी दी कि यदि 24 घंटे के भीतर मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे जिले के सभी निजी क्लीनिक और सरकारी अस्पताल बंद कर देंगे। डॉक्टरों के बढ़ते दबाव को देखते हुए विष्णुनगर पुलिस ने रमेश म्हात्रे, रमेश पवार, प्रकाश निकम और अक्षय कारंडे के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर उन्हें दबोच लिया।
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे (जो स्वयं एक डॉक्टर हैं) ने कहा, “डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ पर हमला किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं है। चिकित्सा सेवा केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि मानवता की सेवा है। कानून हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और दोषी पार्षद के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है”।
वास्तविक बीमारी या आरोपी को वीआईपी ट्रीटमेंट?
रमेश म्हात्रे की गिरफ्तारी के ठीक बाद उनके सीने में दर्द और बेचैनी की शिकायत के बाद उन्हें ठाणे के सिविल अस्पताल के विशेष वार्ड में शिफ्ट किया गया। डॉक्टरों की एक टीम उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है, लेकिन इस आकस्मिक बीमारी ने एक नया राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि जब भी किसी सत्ताधारी नेता या रसूखदार व्यक्ति पर कानूनी शिकंजा कसता है, तो वे जेल की हवा खाने से बचने के लिए ‘अस्पताल’ का सहारा लेते हैं।
असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) सुहास हेमाडे ने स्पष्ट किया है कि बीमारी का बहाना बनाकर कोई भी आरोपी कानूनी प्रक्रिया से बच नहीं सकता। जैसे ही डॉक्टर म्हात्रे को अस्पताल से डिस्चार्ज करेंगे, पुलिस उन्हें कोर्ट में पेश कर आगे की रिमांड मांगेगी ताकि मामले की गहन तफ्तीश की जा सके।
