‘वंदे मातरम’ के बंटवारे ने बोए देश के विभाजन के बीज, शहजाद पूनावाला का नेहरू और कांग्रेस पर बड़ा हमला
Vande Mataram Controversy: भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने आरोप लगाया कि 1937 में जवाहरलाल नेहरू ने मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए 'वंदे मातरम' को दो हिस्सों में बांटा, जिससे देश के विभाजन की नींव पड़ी।
- Written By: आकाश मसने
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला (सोर्स: सोशल मीडिया)
Shehzad Poonawalla Statement: महाराष्ट्र के ठाणे में दिवंगत रामभाऊ म्हालगी स्मृति व्याख्यान के दौरान भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस पर इतिहास को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ का विभाजन केवल एक गीत का बंटवारा नहीं था, बल्कि इसने भारत के भविष्य के विभाजन के बीज बोए, जिसके लिए नेहरू जिम्मेदार थे।
तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर देश को बांटने वाली नीतियों का नेतृत्व करने का आरोप लगाया है। बृहस्पतिवार रात आयोजित दिवंगत रामभाऊ म्हालगी स्मृति व्याख्यान श्रृंखला के 40वें उद्घाटन सत्र में ‘वंदे मातरम एंड नेशनल रिसर्जेंस’ विषय पर बोलते हुए, उन्होंने इतिहास के एक पन्ने का उल्लेख किया।
पूनावाला ने दावा किया कि 1937 में जवाहरलाल नेहरू ने मुस्लिम वोट बैंक को खुश करने के भारी दबाव में आकर राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को दो भागों में विभाजित करने का निर्णय लिया था। उन्होंने इस संदर्भ में उल्लेख किया कि नेहरू ने इस गीत के विभाजन के संबंध में नेताजी सुभाष चंद्र बोस को एक पत्र भी लिखा था। पूनावाला का तर्क है कि राष्ट्रगीत के इस कृत्रिम विभाजन में ही भारत के वास्तविक भौगोलिक विभाजन के बीज छिपे हुए थे।
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‘वंदे मातरम’ गीत को लेकर क्या बोले शहजाद
कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि जिस ‘वंदे मातरम‘ गीत ने कभी राष्ट्रीय एकता और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारतीयों में नव-ऊर्जा का संचार किया था, उसे कांग्रेस ने केवल वोट बैंक की राजनीति का जरिया बना दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की यह बांटने वाली प्रवृत्ति आज भी थमी नहीं है। उनके अनुसार, पार्टी अपने वोट बैंक को सुरक्षित रखने के लिए आज भी भारतीयों को जातिगत आधार पर विभाजित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय अखंडता के लिए एक बड़ा खतरा बताया और कहा कि राष्ट्रवाद के प्रतीकों के साथ ऐसी राजनीति देश के हित में कभी नहीं रही है।
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राष्ट्रगीत के अपमान पर जताई चिंता
अपने संबोधन के दौरान शहजाद पूनावाला ने उन लोगों पर भी कड़ा प्रहार किया जो धार्मिक कारणों का हवाला देकर ‘वंदे मातरम’ गाने से परहेज करते हैं। उन्होंने इस पर गहरा खेद व्यक्त करते हुए कहा कि कुछ लोग जानबूझकर राष्ट्रगीत गाने से इनकार करते हैं और अपने इस कृत्य को धर्म के विरुद्ध बताते हैं। पूनावाला के अनुसार, यह मानसिकता उसी विभाजनकारी सोच का हिस्सा है जो दशकों पहले शुरू की गई थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रगीत का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है और इसे किसी भी राजनीतिक या धार्मिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।
यह स्थिति एक विशाल वृक्ष की जड़ों में उस समय जहर डालने जैसी है जब वह फल देने की अवस्था में हो; जब एकता के प्रतीक (राष्ट्रगीत) की नींव में ही दरार डाल दी गई, तो उससे निकलने वाली राष्ट्रीय भावना की शाखाएं भी बिखरने लगीं।
