अंबरनाथ में आदिवासी छात्रों की छात्रवृत्ति घोटाला उजागर, फर्जी हस्ताक्षर से लाखों की हेराफेरी
Thane news: अंबरनाथ में आदिवासी छात्रों की छात्रवृत्ति में फर्जी हस्ताक्षरों और अंगूठों से हेराफेरी का मामला उजागर हुआ है। अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
- Written By: सोनाली चावरे
अंबरनाथ में आदिवासी छात्रवृत्ति घोटाला (pic credit; social media)
Scholarship Scam of Tribal Students: आदिवासी छात्रों की छात्रवृत्ति योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मनसे विद्यार्थी सेना ने जावसई गांव स्थित जिला परिषद स्कूल में इस गड़बड़ी का खुलासा किया है। आरोप है कि गरीब छात्रों को छात्रवृत्ति की राशि नहीं दी गई, लेकिन स्कूल के रजिस्टर पर अभिभावकों के फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठों के निशान दिखाकर भुगतान दिखाया गया है।
इस मामले को लेकर अभिभावकों ने वांगणी मनसे विभाग अध्यक्ष जयेश केवणे के साथ मिलकर अंबरनाथ पंचायत समिति के समूह शिक्षा अधिकारी विशाल पोटेकर से लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया है कि कक्षा 1 से 4 तक के छात्रों को 1000 रुपए, कक्षा 5 से 7 तक के छात्रों को 1500 रुपए और कक्षा 8 से आगे के छात्रों को 2000 रुपए छात्रवृत्ति दी जानी थी। लेकिन वास्तविक छात्रों को यह रकम कभी नहीं मिली।
अभिभावकों का आरोप है कि छात्रों के बैंक खातों में छात्रवृत्ति न पहुंचने के बाद भी स्कूल प्रशासन ने रिकॉर्ड में भुगतान दर्शा दिया। इससे भी बड़ी बात यह है कि कई रजिस्टरों में अभिभावकों की जगह अज्ञात व्यक्तियों के अंगूठों के निशान पाए गए हैं। सुनीता वाघे नामक अभिभावक ने बताया कि उनकी बेटी कक्षा 8 में पढ़ती थी, उसे छात्रवृत्ति नहीं मिली। लेकिन रजिस्टर में भुगतान दर्ज कर उनके नाम पर किसी अज्ञात व्यक्ति का अंगूठा लगा हुआ है।
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शिकायत दर्ज होते ही शिक्षा विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। समूह शिक्षा अधिकारी पोटेकर ने बताया कि विद्यालय का रजिस्टर कब्जे में लिया गया है और सभी अभिभावकों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच रिपोर्ट जिला परिषद और शिक्षा विभाग को सौंपी जाएगी।
मनसे विद्यार्थी सेना ने आरोप लगाया है कि यह सिर्फ एक स्कूल का मामला नहीं है बल्कि कई जगहों पर इस तरह की हेराफेरी हो सकती है। जयेश केवणे ने मांग की है कि दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो और आदिवासी छात्रों के साथ न्याय किया जाए।
यह मामला न केवल शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है बल्कि गरीब और जरूरतमंद बच्चों के अधिकारों की भी सीधी लूट है। अब देखने वाली बात यह होगी कि शिक्षा विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई करता है।
