मुंब्रा पार्षद सहर शेख का ‘मराठी’ बोलने से इनकार; फर्जी सर्टिफिकेट विवाद के बीच भाषा पर छिड़ा नया संग्राम
Sahar Sheikh Marathi Language Controversy: मुंब्रा पार्षद सहर शेख ने मराठी बोलने से किया मना। फर्जी जाति प्रमाणपत्र विवाद पर दी सफाई। विपक्ष पर साधा निशाना। मराठी भाषा पर छिड़ा संग्राम।
- Written By: अनिल सिंह
Sahar Sheikh Mumbra Corporator (फोटो क्रेडिट-X)
Sahar Sheikh Mumbra Corporator: ठाणे के मुंब्रा से AIMIM की टिकट पर जीतकर चर्चा में आईं पार्षद सहर शेख एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। फर्जी जाति प्रमाणपत्र (Caste Certificate) के आरोपों का सामना कर रही सहर शेख ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। हालांकि, इस दौरान उन्होंने मराठी में बोलने से साफ इनकार कर दिया, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में भाषाई अस्मिता को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो सकता है। सहर शेख ने दो टूक शब्दों में कहा, “मैं मराठी बोलने में सहज नहीं हूं। आप मुझे कोई भी भाषा बोलने के लिए मजबूर नहीं कर सकते।”
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सहर शेख के पिता युनूस शेख ने मीडिया के सामने मूल ओबीसी (OBC) प्रमाणपत्र पेश किया। उन्होंने दावा किया कि यह प्रमाणपत्र तहसीलदार कार्यालय द्वारा वैध तरीके से जारी किया गया है। सहर ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें ‘फरार’ बताकर बदनाम करने की कोशिश की गई, लेकिन वे इस लड़ाई को कानूनी तौर पर लड़ेंगी। उन्होंने शिकायतकर्ता को कोर्ट में देख लेने की चुनौती भी दी।
मराठी बोलने को लेकर तीखी बहस
जब पत्रकारों ने उनसे महाराष्ट्र की राजभाषा मराठी में बोलने का आग्रह किया, तो सहर शेख ने कहा कि उनकी मराठी कमजोर है और वे नहीं चाहतीं कि कोई गलत शब्द बोलने से विवाद हो। उन्होंने कहा कि वे मराठी का सम्मान करती हैं, लेकिन किसी के दबाव में आकर नहीं बोलेंगी। इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में उनकी आलोचना शुरू हो गई है, क्योंकि महाराष्ट्र में सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति से स्थानीय भाषा के प्रति संवेदनशीलता की उम्मीद की जाती है।
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जितेंद्र आव्हाड और किरीट सोमैया से रहा है विवाद
सहर शेख तब सुर्खियों में आई थीं जब उन्होंने शरद पवार गुट के दिग्गज नेता जितेंद्र आव्हाड के गढ़ मुंब्रा में सेंध लगाई थी। जीत के बाद उन्होंने आव्हाड का मजाक उड़ाते हुए तीखी टिप्पणी की थी। इसके बाद मुंब्रा को ‘हरा’ रंग देने के उनके पुराने बयान पर बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। अब प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार की शिकायत पर उनके जाति प्रमाणपत्र की जांच चल रही है, जिसे सहर ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ बता रही हैं।
सुनवाई प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल
सहर शेख ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि तहसीलदार की अनुपस्थिति में नायब तहसीलदार को सुनवाई का अधिकार किसने दिया? उन्होंने जिलाधिकारी कार्यालय में तहसीलदार उमेश पाटील के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की बात भी कही। सहर ने उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें उन्हें उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद का निवासी बताया जा रहा था। उन्होंने प्रमाण देते हुए कहा कि उनकी पूरी शिक्षा ठाणे में हुई है, ऐसे में उन्हें बाहरी बताना पूरी तरह गलत है।
