

Mumbai Underground Road Tunnel: मुंबई के पश्चिमी हिस्से मरीन ड्राइव को सीधे पूर्वी हिस्से में ऑरेंज गेट को जोड़ने के लिए बन रही टनल अब आकार लेने लगी है। एमएमआरडीए के अनुसार मुंबई की अगली पीढ़ी की अंडरग्राउंड कनेक्टिविटी को नया स्वरूप प्रदान करने वाली इस परियोजना का काम तेजी से शुरू है। ऑरेंज गेट की तरफ 250 मीटर सुरंग निर्माण का कार्य पूर्ण हो गया है। इसे मुंबई की सबसे गहरी रोड टनेल माना जा रहा है।
मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने ऑरेंज गेट भूमिगत सड़क सुरंग परियोजना में बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धि हासिल की है। इस टनेल की खुदाई में अत्याधुनिक स्लरी शील्ड टनल बोरिंग मशीन (TBM) तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
गौरतलब है कि मुंबई कोस्टल रोड की सुरंगें मालाबार हिल के नीचे 40-42 मीटर की अधिकतम गहराई तक बनी हैं। लेकिन ऑरेंज गेट प्रोजेक्ट खास तौर पर मुंबई के घनी आबादी वाले क्षेत्र व बड़ी इमारतों के नीचे से गुजरने वाली है। इसलिए इसे 50 मीटर से अधिक की टनलिंग कर बनाया जा रहा है। यह भारत के सबसे कठिन शहरी रोड टनलिंग प्रोजेक्ट्स में से एक है। मुंबई की मुश्किल कोस्टल जियोलॉजी के लिए खास तौर पर बनाई गई भारत की सबसे बड़ी स्लरी शील्ड टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) तेजी से टनलिंग का काम कर रही है। साथ ही स्थायी सेगमेंटल टनल लाइनिंग रिंग्स भी बन चुकी है, जो खुदाई को स्थायी परिचालन अवसंरचना में परिवर्तित करती है। प्रीकास्टिंग के अंतर्गत लगभग 4,600 प्रिसीजन-इंजीनियर्ड प्रीकास्ट कंक्रीट सेगमेंट्स से निर्मित 575 से अधिक टनल लाइनिंग रिंग्स बने हैं।
लगभग 4.8 किमी लंबाई वाले ट्विन टनलों का निर्माण हो रहा है। इस तरह इनकी लंबाई 9.6 किमी होगी। प्रत्येक टनल में दो ट्रैफिक लेन और एक इमरजेंसी लेन होगी। इनमें 80 किमी प्रति घंटा की रफ़्तार से वाहन चल सकेंगे। बेहतर आवागमन सुरक्षा और आपातकालीन पहुंच हेतु प्रत्येक 300 मीटर पर क्रॉस-पैसेज होगा।भूमि-स्तर से लगभग 50 मीटर तक गहराई। मौजूदा इमारतों, रेल और मेट्रो नेटवर्क को प्रभावित किए बिना इसकी योजना बनी है। इसके अलावा सीमलेस मोबिलिटी नेटवर्क अन्य परिवहन कॉरिडोरों के साथ इस टनेल प्रोजेक्ट को जोड़ा जाएगा।
ऑरेंज गेट-मरीन ड्राइव टनल ईस्टर्न फ्री वे से होते हुए सीधे अटल सेतु से जुड़ेगी। जबकि पश्चिमी तट के साथ इसे सीधा लिंक मिलेगा। वाहन मात्र 5 मिनट में मरीन ड्राइव से ईस्टर्न फ्री वे पर पहुंच जाएंगे। 8,056 करोड़ रुपये का यह प्रोजेक्ट साउथ मुंबई के सबसे भीड़-भाड़ वाली सड़कों को बाईपास करने के लिए एमएमआरडीए द्वारा डिज़ाइन किया गया। यह अलाइनमेंट लगभग 700 इमारतों, हेरिटेज साइट्स और मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर के नीचे से सुरक्षित रूप से गुजरने के लिए 12 से 52 मीटर की औसत गहराई बनाए रखता है। यह अंडरग्राउंड सड़क ऑरेंज गेट से डी'मेलो रोड पर पुराने एल्फिंस्टन ब्रिज, रेलवे ट्रैक, जेजे फ्लाईओवर, भिंडी बाज़ार, खेरवाड़ी और लैमिंगटन रोड के नीचे से गुज़रने वाली है। यह मेट्रो 3 लाइन के नीचे से भी गुजरने वाली है। इसे जून 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य राज्य सरकार ने रखा है। इसका विस्तार गिरगांव चौपाटी तक करने का भी प्रस्ताव होने से लंबाई और खर्च दोनों में बढ़ोतरी होने वाली है।
ओरेंज गेट मरीन ड्राइव टनेल रोड प्रोजेक्ट के पूरा होने पर पीक आवर्स में यात्रा समय को 40 मिनट से घट कर मात्र 5 मिनट हो जाएगा। भूमिगत यातायात डायवर्जन के माध्यम से मौजूदा प्रमुख सड़क नेटवर्क का डी-कंजेशन होने से ईंधन और समय की बचत होगी।
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को लेकर सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि “मुंबई अब अवसंरचना विकास के एक नए युग में प्रवेश कर रही है। ऑरेंज गेट भूमिगत टनल जैसे प्रोजेक्ट विश्वस्तरीय शहरी अवसंरचना निर्माण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं, जो भूमि-स्तर पर शहर की परिचालन क्षमता को संरक्षित रखते हुए मोबिलिटी क्षमता को बढ़ाएंगे। ‘पाताल लोक रोड नेटवर्क’ टनल रोड नेटवर्क के माध्यम से तेज़, अधिक कनेक्टेड और मुंबई के निर्माण की दिशा में यह परियोजना एक महत्वपूर्ण कदम है।”
उपमुख्यमंत्री एवं एमएमआरडीए अध्यक्ष एकनाथ शिंदे ने कहा किऑरेंज गेट टनल परियोजना केवल एक परिवहन कॉरिडोर नहीं, बल्कि मुंबई महानगर क्षेत्र के लिए बहुआयामी मोबिलिटी नेटवर्क के निर्माण की दिशा में एक रणनीतिक परिवर्तन है। एमएमआरडीए आयुक्त डॉ. संजय मुखर्जी के अनुसार देश के सबसे घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में से एक के नीचे गहरी शहरी सुरंग का निर्माण एक इंजीनियरिंग चुनौती के साथ उपलब्धि है।