मीरा-भाईंदर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर सवाल, 557 योजनाओं में सिर्फ 13 का हुआ नवीनीकरण
Mira Bhayandar Rainwater Harvesting Projects: मीरा-भाईंदर में वर्षा जल संचयन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप लगाया है कि अधिकांश परियोजनाएं केवल कागजों तक सीमित हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक
मीरा भाईंदर जल संचयन परियोजना (प्रतीकात्मक तस्वीर) (सौ. सोशल मीडिया )
Mira Bhayandar Rainwater Harvesting Projects Update: केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) को अनिवार्य किए जाने के बावजूद मीरा भाईंदर मनपा क्षेत्र में इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि शहर में तेजी से बढ़ते कंक्रीटीकरण, अवैध निर्माण और घटते भूजल स्तर के बावजूद वर्षा जल संचयन योजनाओं की निगरानी और सत्यापन में भारी लापरवाही बरती जा रही है।
वर्ष 2009 से 2023 के बीच मनपा प्रशासन ने 557 वर्षा जल संचयन योजनाओं को मंजूरी दी थी। नियमों के तहत इन योजनाओं के संचालन का हर वर्ष सत्यापन और प्रमाणन आवश्यक है, लेकिन वर्ष 2023-24 में केवल 13 इमारतों ने ही अपनी योजना का नवीनीकरण कराया। इस स्थिति से आशंका जताई जा रही है कि अधिकांश वर्षा जल संचयन प्रणालियां या तो बंद पड़ी हैं या फिर केवल दस्तावेजों तक सीमित होकर रह गई हैं।
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बिल्डरों पर औपचारिकता निभाने का लगाया आरोप
आरोप है कि कई बिल्डर निर्माण अनुमति प्राप्त करने के लिए केवल औपचारिक रूप से रिंगवेल बनाकर दिखा देते हैं। जबकि छतों से वर्षा जल संग्रहण, अलग जल टैंक, पाइपलाइन नेटवर्क और जल पुनर्भरण की अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं नहीं की जातीं। जल आपूर्ति विभाग द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करने की प्रक्रिया में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
जवाबदेही तय करने की मांग
सामाजिक कार्यकर्ता धीरज परब ने मनपा से मांग की है कि सभी वर्षा जल संचयन योजनाओं की व्यापक जांच कराई जाए और जल आपूर्ति विभाग के संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ प्रशासनिक तथा आपराधिक कार्रवाई की जाए।
उन्होंने यह भी माग की कि जिन इमारतों में वर्षा जल संचयन प्रणाली अनिवार्य होने के बावजूद चालू नहीं है, उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए। आवश्यकता पड़ने पर अधिभोग प्रमाण पत्र (ओसी) रद्द करने और जल कनेकान काटने जैसे कदम भी उठाए जाएं।
झुग्गी बस्तियों तक अनिवार्य हो व्यवस्था
आवासीय इमारतों तक ही नहीं, बल्कि सरकारी कार्यालयों, व्यावसायिक परिसरों, स्कूलों, सार्वजनिक शौचालयों, पार्को, कब्रिस्तानों, खेल मैदानों, झुग्गी-झोपड़ियों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी वर्षा जल संचयन को अनिवार्य बनाए जाने के साथ साथ सड़कों, डिवाइडरों, ट्रैफिक आइलैंड और फ्लाईओवर के नीचे जल पुनर्भरण गड्ढे विकसित करने की भी मांग की गई है, ताकि बारिश के पानी का अधिकतम उपयोग किया जा सके।
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जनजागरण और सख्त अमल की जरूरत
मनपा प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और अन्य लोक सेवकों से वर्षा जल संचयन को लेकर गंभीरता दिखाने, व्यापक जनजागरण अभियान चलाने और संबंधित कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की मांग की गई है। उनका मानना है कि इस दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाने से शहर की दीर्घकालिक जल समस्या के समाधान के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
मीरा भाईंदर से नवभारत लाइव के लिए विनोद मिश्रा की रिपोर्ट
