Thane: हर साल जलभराव से जूझते मीरा-भाईंदर के लिए ठोस समाधान की ओर कदम, मानसून से पहले कार्रवाई
Maharashtra News: मीरा-भाईंदर शहर में मानसून के दौरान होने वाली बाढ़ की समस्या से स्थायी निजात दिलाने के लिए मनपा प्रशासन ने विशेष समिति गठित की है।
- Written By: अपूर्वा नायक
मीरा भाईंदर मनपा (सोर्स: सोशल मीडिया)
Mira Bhayandar News In Hindi: मानसून के दौरान हर साल मीरा-भाईंदर शहर के निचले हिस्सों में उत्पन्न होने वाली बाढ़ की गंभीर समस्या से स्थायी निजात दिलाने के लिए मनपा प्रशासन अब ठोस कदम उठाने की तैयारी की है।
जलभराव के कारणों का गहराई से अध्ययन कर प्रभावी समाधान लागू करने के उद्देश्य से मनपा ने एक विशेष समिति का गठन किया है। समिति को निर्देश दिए गए हैं कि आगामी मानसून से पहले आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।
मीरा भाईंदर शहर की भौगोलिक स्थिति बाढ़ की समस्या को और जटिल बनाती है। शहर एक ओर संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान की पहाड़ियों से घिरा है, जबकि अन्य तीन ओर खाड़ी और समुद्र तट स्थित हैं। मानसून में पहाड़ियों से उतरने वाला वर्षा जल सीधे शहर में प्रवेश करता है। वहीं, भारी बारिश के साथ ज्वार आने की स्थिति में समुद्र का पानी खाड़ी के रास्ते शहर में उल्टी दिशा से घुस आता है।
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इस दोहरे दबाव के कारण नालियों के माध्यम से वर्षा जल का निकास बाधित हो जाता है। परिणामस्वरूप काशीमीरा, भाईंदर पूर्व का नवघर क्षेत्र, भाईंदर पश्चिम की बेकरी गली सहित कई इलाकों में पिछले कुछ वर्षों से लगातार बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती है। इससे नागरिकों के घरों में पानी भर जाता है, घरेलू सामान, व्यापारियों का अनाज और बिजली उपकरण खराब हो जाते हैं, जिससे बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
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प्रत्यक्ष निरीक्षण करने का आदेश
अब तक प्रशासन की ओर से हर वर्ष जलशोधन पंप लगाने जैसे अस्थायी उपाय किए जाते रहे हैं, लेकिन इन्हें दीर्घकालिक समाधान नहीं माना जा रहा। मनपा आयुक्त राधाविनोद शर्मा ने अतिरिक्त आयुक्त की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय समिति का गठन किया है, जिसमें शहर अभियंता, सहायक संचालक सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल है। समिति को अगले एक माह के भीतर जलभराव वाले क्षेत्रों का प्रत्यक्ष निरीक्षण कर बाढ़ के कारणों का अध्ययन करने का आदेश दिया गया है, रिपोर्ट के आधार पर नालियों को चौड़ा करने, आपस में जोड़ने तथा अन्य आवश्यक संरचनात्मक सुधारों की योजना बनाई जाएगी। जिन कार्यों में अधिक समय लगेगा, उन्हें अगले मानसून तक पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।
